डॉ. रामवीर कुछ रिश्ते तो टूट गए हैं कुछ हैं टूटने वाले ज्यादातर मित्रों ने मुंह पर लगा लिए हैं ताले। जब टीवी पर पच्चीस एंकर फैलाएं अफवाहें दुष्ट और
डॉ रामवीर इंसान कहां है इंसान मत खुलवाओ जुबान इंसान असल में कुत्ता है टुकड़े फेंको तो दुम हिलाता है उलटा लेट कर पेट दिखाता है कह लो इसे वफादारी
डॉ. रामवीर श्वान फिर समाचारों में है। इस बार सर्वोच्च न्यायालय के सौजन्य से। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला ने स्वत: संज्ञान लेते हुए (स्यूओ मोटो) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को आवारा कुत्तों
— डॉ. रामवीर किसकी देखे बाट पथिक तू कोई साथ न देने वाला लोग हुए हैं स्व तक सीमित पी कर तुच्छ स्वार्थ की हाला। लम्बी राह दूर है मंजिल
यह शेर सुना होगा। कविता लिखने में दिलो-दिमाग दोनों से काम लेना पड़ता है। आज दिमाग थका हुआ था, छुट्टी मांग रहा था, वैसे दिमाग बड़ा आज्ञाकारी है – सदा
डॉ. रामवीर फैला रहे हैं लोग पुरानी कुछ वैसी ही बातें देश विभाजन में की गई थीं जैसी खुराफातें। बढ़ा रहे हैं उग्र घृणा के भडकीले कुविचार अन्धों को दिखती
डॉ. रामवीर नेताओं के सार्वजनिक भाषण और संसद व विधानसभाओं में हुई बहस मीडिया में हैडलाइन बनती देखी है पर कुछ दिनों से न्यायालयों की कार्यवाही में न्यायाधीशों की टिप्पणी
डॉ. रामवीर धर्मध्वजी कुपढ संन्यासी दे रहे हैं व्याख्यान मानव द्वारा मानवता का हो रहा है अपमान। महामूढ हठी अनपढ भी कहलाते विद्वान् बदल रहे हैं आज देश में सारे
डॉ. रामवीर दिल्ली के चहुं ओर फैले एन सी आर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) को समाजशास्त्र की दृष्टि से देखें तो ग्रामीण क्षेत्र में एक परिवर्तन दिखाई पडता है। केन्द्र और
डॉ. रामवीर मैं व्याकुल हूं प्रश्नाकुल हूं किससे करूंं सवाल पूछो तो उत्तर नहीं मिलता हो जाता है बवाल। आज देश में देख रहा हूं ऐसे ऐसे दृश्य जिन्हें देख