डॉ. रामवीर दिल्ली के चहुं ओर फैले एन सी आर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) को समाजशास्त्र की दृष्टि से देखें तो ग्रामीण क्षेत्र में एक परिवर्तन दिखाई पडता है। केन्द्र और राज्यों की भाजपानीत सरकारों की आर्थिक नीतियों के परिणामस्वरूप कृषि भूमि के मूल्य में जो उछाल आया है उससे किसान परिवारों में आपसी प्रेम और सहयोग की भावना घटी है। गांव के सरल स्वभाव लोग बात के धनी होते थे, जो कहा उस पर अटल। अब ऐसे लोग अपवाद हैं, विरल हैं। भूमि मूल्य चढा तो दादा लाई सम्पत्ति के बटवारे तक में चालाकियों का चलन शुरू हो गया। भतीजे के लालच का नतीजा देखें कि अपने वयोवृद्ध मानसिक रूप से अस्थिर चाचा की जमीन दानपत्र के माध्यम से (दूसरे जीवित चाचा से छिपा कर) अपने नाम चढ़वा ली। पंजाब कनाडा मैनिया की गिरफ्त में है। आज पंजाब के ग्रामीण युवाओं के मन में कनाडा का वह स्थान है जो इस्लाम में जन्नत का है। ‘हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन, दिल के ख़ुश रखने को ग़ालिब ये खय़ाल अच्छा है।’ कह कर ग़ालिब ने तो खबरदार कर दिया था पर सरकार नहीं चाहती कि कनाडा की जमीनी हकीकत को भारत के युवा पहचानें। गलत तरीके से मोटी रकम लेकर भारतीयों को डंकी रूट से कनाडा/अमेरिका में ठेलने वाले एजेंट्स की एक बडी लॉबी पंजाब और हरियाणा में जड जमा चुकी है। अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण युवा भी कनाडा करिश्मे की गिरफ्त में आते जा रहे हैं। सरकारों के लिए ये एजेंट भी कमाऊ पूत हैं लिहाजा सरकारें इनकी करतूतों पर कार्रवाई नहीं करती, युवा ठगे जाएं इनकी बला से! बाप पर कनाडा जाने का बेटे का दबाव बाप को चाचा की जमीन हथियाने की हद तक अनैतिक बना देता है। तथाकथित ग्लोबलाइजेशन का एक पाश्र्व प्रभाव यह भी है कि ग्रामीणों का पारम्परिक सौहार्द समाप्त हो रह