डॉ. रामवीर एक समय था जब ‘साहित्य समाज का दर्पण है’ कहा जाता था। साहित्यकार पथप्रदर्शक की भूमिका में होते थे। सूचना तकनीकी के वर्तमान युग में वैसा साहित्य नहीं
डॉ. रामवीर केवल आत्मप्रदर्शन ही है जिनका जीवनदर्शन फोटो जीवी नेताओं से दुखी है आज वतन। लगता झूठ बोलने का ही लेते हैं ये वेतन कभी कभी तो हद कर
डॉ. रामवीर आज फस्र्ट अप्रैल है सारे मूर्खों का अभिनन्दन साल में एक बार उनका भी करते हैं हम वन्दन। ‘ओम् मूर्खाय नम:’ मन्त्र का आओ करें उच्चारण खुशनुमा माहौल
डॉ. रामवीर सभी की तरह लेखकों की भी समस्याएं हैं। लेखक लिखना चाहता है विषय नहीं सूझता। यह अनिद्रा रोग की तरह है, आदमी सोना चाहता है नींद नहीं आती।
डॉ. रामवीर रोग विज्ञान/विकृति विज्ञान (Pathology) चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जिसका विकास और विस्तार वर्तमान समय में अधिक हुआ है। पैथोलॉजी लैब्स की बाढ़ सी आई हुई है।
डॉ. रामवीर अभी जानने लायक आधी बातें भी वे नहीं जानते फिर भी बेशर्मी से खुद को सर्वोपरि विद्वान् मानते। ज्ञान भले हो आधा अधूरा किन्तु बहस से नहीं भागते
डॉ रामवीर किसी की नजरों में चढऩे को गिर जाते हैं लोग चमचागिरी का उन्हें भयावह लग जाता है रोग। चमचागिरी में निरे झूठ का ही होता है प्रयोग धीरे
डॉ. रामवीर पढ़ कर दिन प्रतिदिन समाचार बहुधा मन में उठता विचार क्या कारण है क्यों भारत में है व्याप्त चतुर्दिक् भ्रष्टाचार। यूं तो कारण होंगे अनेक सर्वप्रमुख है उनमें
डॉ. रामवीर जनता भी क्या करे बिचारी किस पर करे यकीन जिसको भी गद्दी पे बिठाया वो ही निकला कमीन। जो कहते थे हमें जिताओ हम हैं सबसे जहीन वे
डॉ. रामवीर फॉर्वर्ड फॉर्वर्ड खेल रहे हैं व्हाट्सैप पर सारे मित्र स्नोबालिंग करते बच्चों का उभर रहा है मन में चित्र। बच्चे तो बच्चे होते हैं बूढ़े बच्चों से भी