डॉ. रामवीर एक समय था जब ‘साहित्य समाज का दर्पण है’ कहा जाता था। साहित्यकार पथप्रदर्शक की भूमिका में होते थे। सूचना तकनीकी के वर्तमान युग में वैसा साहित्य नहीं रचा जा रहा जो कभी जनता की जहनी खुराक/बौद्धिक भोजन होता था। समाचारपत्रों में आने वाले साहित्यिक परिशिष्ट घट रहे हैं या बंद हो गए हैं। अधिकतर लोग सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी कहास/लिखास/छपास/भड़ास निकाल रहे हैं। कुछ गिने चुने लोग लिखते हैं, अधिकतर दूसरों के वीडियोज को ग्रुप में डालने में ही क्रिएटिविटी देखते हैं। यह कुछ ऐसा ही है जैसे पहले लोग घरों के लैटर बॉक्स में पर्चे डालने के लिए दिहाड़ी पर लड़के लगाते थे। अब राजनीतिक दलों से जुड़े अन्धभक्त या अन्धविरोधी यह सेवा नि:शुल्क दे रहे हैं और अपने अपने नजरिए से देशभक्ति का गुड फील ले रहे हैं। वैसे तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अंग्रेजो भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग नहीं लिया पर यदि उन दिनों सोशल मीडिया होता तो ये शायद ‘अंग्रेजो (चाहो तो) भारत छोड़ो’ ऐसा कोई मैसेज फॉर्वार्ड कर देते और आज सुधांशु त्रिवेदी जैसे पण्डितम्मन्य प्रवक्ता इसे स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लेने का सबसे बड़ा प्रमाण बताते फिरते, गान्धीजी के दांडी मार्च से भी बड़ा।
जिन ग्रुप्स के सदस्य विभिन्न पृष्ठभूमि के हैं उनमें एक ऐसा मैच चलता रहता है जिसके न नियम हैं और न कोई एम्पायर। कभी कभी कुछ स्वयंसेवी चीयरलीडर्स अवश्य दिख जाते हैं। एक पक्ष का ज्ञानी दूसरे पक्ष का अज्ञान दिखाने के चक्कर में स्वयं अपने ज्ञान की जडें दिखा देता है। संघी स्वयम्भू देशभक्त जब नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और सरदार पटेल के बारे में मुंह खोलते हैं तो ऐसा दिखाते हैं जैसे ये दोनों भी संघ के गणवेष में शाखा में जाते रहे हों, बोस और पटेल ने संघ के बारे में जो कहा था उसके बारे में संघियों का अज्ञान इनके अनपढ़ होने का सुबूत है, या कहें कि जानते तो हैं पर जिक्र कैसे करें यह समस्या है।
राजनीतिक दलों के आईटी सैल्स से बहते कचरे को ग्रुप में ज्ञान की तरह बांटने वाले अज्ञानियों ने सोशल मीडिया को एक कूड़ेदान बना दिया है, इट स्टिंक्स। इस सडांध में सामाजिक सामंजस्य का ह्रास स्पष्ट दिखता है। दलविशेष के एक्सक्लूसिव ग्रुप में माहौल ऐसा रहता है जैसे स्वयंसेवकों को शाखा में और जमाते इस्लामी वालों को मदरसे में मिलता है। कुल मिला कर ग्रुप्स हैं तो कूड़ेदान ही पर कभी कभी कोई काम की चीज यूं मिल सकती है जैसे रैगपिकर्स को कूड़े में चूड़ी मिल जाए।