फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) निगम प्रशासन द्वारा कहा जा रहा है कि इस दिवाली पर शहर भर की सड़कों व चौराहों पर सजावटी रंग-बिरंगी रोशनी के अलावा और भी कई तरह के सजावटी काम किए जाएंगे। बेशक यह सजावट दो-चार दिन के लिए ही हो लेकिन इसके नाम पर जो अनाप-शनाप खर्चा किया जाएगा उसे पूछने वाला कोई नहीं होगा। किसको फुर्सत और जरूरत है जो देखे कि किस सड़क व चौराहे पर किस-किस तरह की कितनी सजावट की गई है? जिस नगर निगम में केवल कागज़ों पर ही काम करके 200 करोड़ रुपये डकारे जा सकते हों, जहां सतबीरा जैसा ठेकेदार मुकदमे दर्ज होने के बावजूद अब भी फर्जी बिल वसूलने से न घबराता हो, वहां भला उस सजावट का हिसाब-किताब कौन ले सकता है जिसका चार दिन बाद कोई नामों-निशान ही नहीं रहना। बेशर्मी की इन्तेहा इतनी है कि बाटा आरओबी व हार्डवेयर चौक के गड्ढे दिन-ब-दिन गहरे व चौड़े होते जा रहे हैं। विदित है कि इनकी मरम्मत पर साल भर पहले ही लाखों रुपए खर्च हो चुके हैं। बाटा आरओबी पर तो लगभग हर साल, कभी पीडब्लूडी तो कभी एमसीएफ तो कभी एफएमडीए द्वारा मरम्मत के नाम पर लाखों रुपए डकार लिए जाते हैं। गौरतलब यह भी है कि इन स्थानों पर होने वाले छोटे-छोटे गड्ढों को यदि तुरन्त भर दिया जाए तो काम बहुत सस्ते में निपट सकता है।
लेकिन ये चोर महकमे छोटे-मोटे सस्ते काम करना पसंद नहीं करते, ये लोग तभी काम को हाथ लगाते हैं जब लाखों-करोड़ों रुपए के बिल बनने हों। नीलम चौक पर कई महीनों तक गड्ढे झेलने के बाद करीब छ: माह पूर्व मरम्मत कार्य किया गया था। लेकिन यह कार्य इतना घटिया क्वालिटी का था कि इतनी जल्दी सभी गड्ढे फिर से निकल आए हैं। अब इनमें मरम्मत के नाम पर मलबा आदि भर कर बिल की रकम डकारी जा रही है। जाहिर है इस तरह का मलबा सप्ताह भर भी गड्ढों में टिक नहीं पाता और इससे जो धूल उड़ कर प्रदूषण को बढ़ाती है वह अलग। जनता के धन की यह लूट कोई लुकी-छिपी न होकर पूरी तरह चौड़े में हो रही है। इसे न केवल तमाम उच्चाधिकारी बल्कि क्षेत्र के विधायक एवं मंत्री आदि भी देख कर खामोश हंै। खामोश हों भी क्यों न, हमाम में तो सभी नंगेे हैं।