फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) निजी डेवलपर द्वारा विकसित ग्रीनफील्ड कॉलोनी की सार्वजनिक संपत्ति पर
केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर और उनके चेले बीरेंद्र भड़ाना उर्फ बिंदे ने नजरें गड़ा दी हैं। नेताजी इन
संपत्तियों को बाकायदा किराए पर उठाकर कमाई करने में भी जुट गए हैं। करें भी क्यों न, जब निजी
कॉलोनी वालों को सरकारी संसाधनों के जरिए पर्याप्त से दोगुना पेयजल आपूर्ति कराएंगे तो इस सेवा की वसूली भी
की जाएगी।
अर्बन इंप्रूवमेंट कंपनी (यूआईसी) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित ग्रीनफील्ड कॉलोनी आज तक नगर निगम को
हस्तांतरित नहीं हुई है। यह कॉलोनी भाजपा वोटरों का गढ़ मानी जाती है, इसीलिए निजी होने के बावजूद केंद्रीय
मंत्री कृष्णपाल गूजर के इशारे पर इस कॉलोनी में पेयजल आपूर्ति के लिए एफएमडीए रैनीवेल लाइन डाल रहा
है। इस अहसान का बदला गूजर का चेला पार्षद बिंदे भड़ाना कॉलोनी के कम्युनिटी सेंटर को जागीर की
तरह इस्तेमाल कर ले रहा है। दरअसल, बिंदे ने बिना आरडब्ल्यूए या यूआईसी की इजाजत के यह कम्युनिटी सेंटर खुद ही किराए पर उठाना शुरू कर दिया है। बीते सोमवार कम्युनिटी सेंटर में एक शादी समारोह का आयोजन हो रहा था, बिना अनुमति के कार्यक्रम कराए जाने से आरडब्ल्यूए के लोगों ने आपत्ति जताई और 112 कॉल कर पुलिस को तलब कर लिया। समारोह का आयोजन करने वालों ने बाकायदा 12 हजार रुपये की रसीद दिखाकर बताया कि उन्होंने यह सेंटर बुक कराया है। रसीद जीआरडब्ल्यूएस के नाम से जारी की गई थी। स्थानीय लोगों
ने इस तरह की कोई संस्था नहीं होने का दावा किया।
आयोजनकर्ता ने बताया कि कम्युनिटी सेंटर के पास ही लगे बोर्ड में सेंटर बुक कराने के लिए नंबर दिए गए
हैं, उन नंबरों पर संपर्क कर सेंटर बुक कराया था। तफ्तीश की तो पता चला कि पार्षद बिंदे भड़ाना की ओर से जीआरडब्ल्यूएस के नाम पर सेंटर की बुकिंग की जा रही है। इस मामले में बिंदे भड़ाना ने तर्क दिया कि कम्युनिटी सेंटर है तो जरूर यूआईसी का लेकिन वह इसकी बुकिंग नहीं करती, इस पर ग्रीनफील्ड कॉलोनी वालों
का अधिकार है, क्योंकि इसके लिए उन सबने लाखों रुपये खर्च किए हैं, अब यदि कोई कार्यक्रम होगा तो वे कहां जाएंगे। दावा किया कि उन्होंने कम्युनिटी सेंटर की बुकिंग का अधिकार जीआरडब्ल्यूएस को दिए जाने की मांग करते हुए कुछ समय पहले यूआईसी को पत्र लिखा था। यह भी मांग की गई थी कि अन्य सेक्टरों की तरह ही जीआरडब्ल्यूएस ही कम्युनिटी सेंटर की देखभाल और मेंटिनेंस करेगी, लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं आया।
बताया कि कम्युनिटी सेंटर की देखभाल के नाम पर लोगों से बुकिंग के नाम पर सिर्फ 12 हजार रुपये लिए
जाते हैं। यानी संपत्ति यूआईसी की इस्तेमाल का अधिकार ग्रीनफील्ड कॉलोनीवासियों का और वसूली कर रहे
गूजर के चेले बिंदे भड़ाना। शुक्र यह है कि बिंदे महाराज ने यह चिट्ठी सिर्फ कम्युनिटी सेंटर के लिए लिखी,
यदि मोदी से लाल किला मांगने की चिट्ठी भर लिख देते, तो वह भी बिंदे का हो जाता, और उसे भी किराए पर चढ़ाते रहते।
जानकारों के अनुसार गूजर और उनके चेलों की नजर सिर्फ कम्युनिटी सेंटर पर ही नहीं है कॉलोनी की ऐसी ही 16 अन्य सार्वजनिक प्रॉपर्टी भी हड़पे जाने की तैयारियां चल रही हैं। यूआईसी चेयरमैन संजय सूद के ओएसडी सतेंद्र चौहान के अनुसार ग्रीनफील्ड कॉलोनी में यूआईसी की जिन संपत्तियों पर अवैध कब्जे हैं, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी पहचान कर उन्हें कब्जा मुक्त कराने का आदेश पुलिस कमिश्नर सतेंद्र कुमार गुप्ता, डीटीपी एन्फोर्समेंट और यूआईसी में न्यायालय द्वारा तैनात कमिश्नर अरुण को दिया था।
सभी अधिकारियों ने संयुक्त रूप से जांच कर 16 स्थानों की पहचान की थी जिन पर अवैध कब्जे हैं। यह रिपोर्ट 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को स्पष्ट आदेश किया था कि इन 16 स्थानों के साथ आगे और अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। सतेंद्र चौहान के अनुसार कम्युनिटी सेंटर भी इन 16 स्थानों में शामिल है, जीआरडब्ल्यूएस ने अवैध रूप से बुकिंग करके कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश चाहे जो हो, पुलिस कमिश्नर सतेंद्र कुमार गुप्ता केंद्रीय मंत्री गूजर और उनके चेले बिंदे भड़ाना के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।
जाहिर है कि अभी कम्युनिटी सेंटर पर कब्जा हुआ है, धीरे धीरे सारी 16 प्रॉपर्टी से भी यही गैंग वसूली करेगा, ग्रीनफील्ड वासी या यूआईसी वाले कुछ नहीं कर पाएंगे। करेंगे भी कैसे जब तक इनसे डरना व इनकी
चापलूसी छोड़ कर इनके सामने डटकर खड़ा होना नहीं सीखेंगे, तब तक ये गुंडा गिरोह आम शहरियों का ऐसे ही
दोहन करता रहेगा।
रेहड़ी वालों तक से होती है उगाही
ग्रीन फील्ड कॉलोनी में सब्जी, फल आदि बेचने के लिए रेहड़ी से फेरी लगाने वालों को भी केंद्रीयमंत्री
कृष्णपाल गूजर और बिंदे भड़ाना के सजातीय गुंडों को हफ्ता देना पड़ता है। जानकारों के अनुसार रेहड़ी
वालों से वसूली का काम अनंगपुर के गूजरों ने अपने हाथ में ले रखा है। चर्चा है कि अधिकतर वसूली वाले गूजर के चेले चपाटे हैं, बिना मेहनत मोटी कमाई देख कर पार्षद बिंदे भड़ाना के मुंह से भी लार टपक रही है, वह भी अपने चेलों को वसूली के काम में लगाना चाहता है लेकिन बड़े गूजर के कारण उसकी चल नहीं पा रही है, बताया जाता है कि बावजूद इसके वह अपने चेलों को गाहे बगाहे वसूली के लिए भेजता रहता है। बड़ा सवाल यह है कि रेहड़ी वालों से अवैध वसूली की जानकारी पुलिस को भी है लेकिन वह कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाती।