डॉ. रामवीर
आज फस्र्ट अप्रैल है सारे मूर्खों का अभिनन्दन साल में एक बार उनका भी करते हैं हम वन्दन।
‘ओम् मूर्खाय नम:’ मन्त्र का आओ करें उच्चारण खुशनुमा माहौल देश में है उनके ही कारण।
भारत में वैसे भी आजकल चल रहा उनका काल अमृतकाल तो नाम है वास्तव में है मूर्खता काल।
कार्ल माक्र्स का नारा था मजदूरो एक हो जाओ यू आर नथिंग टु लूज एक्सैप्ट योर चेन्स।
अमृतकाल में वो ही नारा रूप बदल कर आया मूर्खो एक हो जाओ ओनली गेन्स ही गेन्स।
महापण्डितों की बातें सब लोग समझ नहीं पाते मन हलका हो जाता है मूर्खो से करके बातें।
मूर्खों से वैसे तो हमारे मिलते नहीं विचार फिर भी स्वकर्तव्य मानते करना उनसे प्यार।
आखिर वे भी भारतीय हैं हम नहीं करते भेद भेदभाव करने का हमने सदा किया है निषेध।
जो कोई अन्यों से स्वयं को माने अधिक महान उसके अल्पबुद्धि होने की यह ही तो पहचान।
हैप्पी अप्रैल फूल मूर्खो मिलेंगे अगले साल कृपया शान्तिपूर्वक रहना करना नहीं बवाल।