डॉ. रामवीर
फैला रहे हैं लोग पुरानी कुछ वैसी ही बातें देश विभाजन में की गई थीं जैसी खुराफातें।
बढ़ा रहे हैं उग्र घृणा के भडकीले कुविचार अन्धों को दिखती है इसमें वोट की पैदावार।
खेतों में जलती है पराली तो कहते पोल्यूशन और इधर घर बार जलाने में देखें सोल्यूशन।
जिनके लिए धर्म है केवल आरती अथवा नमाज उनके षड्यन्त्रों में कदाचित् फंस न जाए समाज।
आसां हैं करने करवाने जलसे और जागरण असली परीक्षा तो है कैसा करते लोग आचरण।
दोनों ओर के ज्ञानी हमें तो लगते हैं अनजान कूए के मेंढक को जलधि की न होती पहचान।
जो आकंठ घृणा में डूबे नफरत जिनके अंदर देशभक्त औ देशद्रोही का वे बतला रहे अन्तर।
याद आता है वही पुराना पहले पढ़ा उद्धरण ‘पैट्रियटिज्म इज द लास्ट रिफ्यूज ऑव द स्काउंड्रल’।
लाखों बलिदानों के बाद मिली थी जो आजादी उसको खो कर ले न आएं नेता कहीं बरबादी।