back to homepage

कविता

पलवल एसपी रह चुके हैं नकली दवा रैकेट केस में फंसे दीपक गहलावत

मज़दूर मोर्चा ब्यूरो पुडुचेरी में करीब पांच हजार करोड़ रुपये के नकली मिलावटी दवाओं का रैकेट चलाने के आरोपी एन राजा उर्फ वल्लियप्पन उर्फ राजशेखर को सीबीआई जांच से बचाने

Read More

बेरोजगार का प्यार

प्रो. रामवीर तेरी चाह नहीं हो दिल में ऐसी कोई बात नहीं लेकिन जुल्फों के साये में सोने के हालात नहीं।   अभी जुगाड मुझे करना है कोई नौकरी पाने

Read More

पत्रकारिता का अंधा युग-३० अन्याय के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को बंद करने की साजिश

आनन्द स्वरूप वर्मा 29 अगस्त, 2004 को उत्तराखंड में ऊधमसिंह नगर जिले के एसएसपी की देखरेख में पाँच लोगों को माओवादी होने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने

Read More

रोजग़ार की भरमार, 94 करोड़ को सामाजिक सुरक्षा! कमाल ही कमाल!

करीब 146 करोड़ आबादी वाले जिस देश में केंद्र व राज्य सरकारों के साथ ही सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों को मिलाकर बमुश्किल ढाई करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा मिल

Read More

मनगढ़ंत कहानियों और झूठ का पुलिंदा: नोएडा श्रमिक आन्दोलन से सम्बन्धित मुकदमों (163/2026, 164/2026 और 165/2026) में पुलिस द्वारा दायर की गयी चार्जशीट में क्या है?

  मनगढ़ंत कहानियों और झूठ का पुलिंदा: नोएडा श्रमिक आन्दोलन से सम्बन्धित मुकदमों (स्नढ्ढक्र  नंबर 163/2026, 164/2026 और 165/2026) में क्क पुलिस द्वारा दायर की गयी चार्जशीट में क्या है?

Read More

अमृत काल में कुछ लोगों की…

डॉ. रामवीर  अमृत काल में कुछ लोगों की इतनी कम हो गई बिनाई जो हो रहा है खुल्लम-खुल्ला वो भी देता नहीं दिखाई। न्यायालय में न्याय न मिलता विद्यालय से

Read More

देशभक्ति औ राष्ट्रवाद का….

डॉ. रामवीर  देशभक्ति औ राष्ट्रवाद का जो करते हैं दिखावा उनका आचरण बतलाता है झूठा उनका दावा। अपने मुंह अपनी ही प्रशंसा करने वाला नेता अपने हास्यास्पद होने का ही

Read More

कुछ लोगों को आपत्ति है…

डॉ. रामवीर  कुछ लोगों को आपत्ति है क्यों हम कहते हैं सच्चाई वे चाहते हैं उनकी तरह ही करते रहें झूठों की बड़ाई। तुम स्वतन्त्र हो करो जो चाहो पर

Read More

जनता भी क्या करे बिचारी…

डॉ. रामवीर  जनता भी क्या करे बिचारी किस पर करे यकीन जिसको भी गद्दी पे बिठाया वो ही निकला कमीन। जो कहते थे हमें जिताओ हम हैं सबसे जहीन वे

Read More

बस साँस बचा लेना काफी नहीं अश्विनी कुमार सुकरात

अश्वनी कुमार सुकरात AQI हज़ार सही, साँसों पे भार सही, इस शहर की गिरफ्त में जो राही, क्या निकल पाएगा? हवा ज़हर, साँस कजऱ्—जि़ंदगी एक इल्तिज़ा, अब हुई इस शहर-ए-धुएँ

Read More