कुछ लोगों को आपत्ति है…

कुछ लोगों को आपत्ति है…
February 13 08:11 2026

डॉ. रामवीर 
कुछ लोगों को आपत्ति है
क्यों हम कहते हैं सच्चाई
वे चाहते हैं उनकी तरह ही
करते रहें झूठों की बड़ाई।

तुम स्वतन्त्र हो करो जो चाहो
पर हमको कृपया करो माफ
हम तो वही कहते जो बिल्कुल
दीख रहा जनता को साफ।

अब जनता भी जान गई है
क्या है तुम्हारा असली मकसद
चाहते हो कि अन्धभक्तों से
ही भर जाए सारी संसद।

दो और दो को चार बताने
वाला कोई न जाए जीत
चाहते हो संसद में केवल
गूंजें अन्धभक्ति के गीत।

हो सकता है तुच्छ स्वार्थवश
कुछ हो जाएं तुम्हारे मीत
ईडी तथा सीबीआई से
तुम कर देते हो भयभीत।

याद रहे यह सदा न होगा
भारत की यह नहीं है रीत
यहां पांच ने सौ को हराया
और सत्य की ही हुई जीत।

भारत की बातें करते हो
महाभारत से न सीखते

तुम्हें युधिष्ठिर से क्या लेना
दुर्योधन को पूज्य मानते।

मानो चाहे जिसको मानो
हम क्या कहें तुम्हारी मर्जी
शनै: शनै: जनता भी जानने
लगी है तुम हो कितने फर्जी।

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Mazdoor Morcha
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