प्रो. रामवीर
तेरी चाह नहीं हो दिल में
ऐसी कोई बात नहीं
लेकिन जुल्फों के साये में
सोने के हालात नहीं।
अभी जुगाड मुझे करना है
कोई नौकरी पाने का
वक्त नहीं है अभी सुन्दरी
प्यार के नग्मे गाने का।
तुम्हें प्रतीक्षा करनी होगी
समझो मेरी मजबूरी
रोजी रोटी के प्रबन्ध तक
रखनी जरूरी है दूरी।
तेरा प्यार अनमोल धरोहर
तू ही दिल की सम्राजी
किन्तु मिलन तब ही सम्भव है
जब हो नियति भी राजी।
मैं हूं दिल का सौदाई
रुचि नहीं केवल तन में
जैसे गन्ध बसे चन्दन में
वैसे तू भी बसी मन में।
अमृतकाल चल रहा देश में
रोजगार नहीं मिलता
बेरोजगार युवक के घर
प्यार का दीप नहीं जलता।
आज देश में जिनकी चल रही
वे स्वभाव से नारीद्वेषी
रोजगार औ प्यार दोनों की
करके रहेंगे ऐसी-तैसी।