फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े चालीस से अधिक काम लेकिन भुगतान केवल 15 कार्यों का ही, प्रसूति के लिए 24 घंटे मुस्तैद रहने, कुष्ठ रोगी, टीबी रोगियों की सुश्रूषा जैसे काम करने वाली आशा वर्करों का गुस्सा बहरी सरकार के खिलाफ 18 सितंबर सोमवार को फूट पड़ा। चार हजार में दम नहीं 26000 से कम नहीं के नारों से गगन भेदती इन आशा वर्करों ने मांगें पूरी नहीं होने तक हड़ताल पर बने रहने का संकल्प जता कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीएम मनोहर लाल खट्टर और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को एकजुटता का संदेश भेजा।
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सिटू) की राज्य के महासचिव कामरेड जयभगवान और सचिव सुनीता के नेतृत्व में फरीदाबाद, पलवल, होडल, हथीन, मेवात से आईं हजारों की संख्या में आशा वर्कर बडख़ल फ्लाईओवर के नीचे पुलिस बूथ के पास इकट्ठा हो गईं। यातायात में बाधा न हो इसका ख्याल रखते हुए लाल यूनिफार्म में लाल झंडे लिए ये आशा वर्कर मोदी, खट्टर और अनिल विज के खिलाफ नारे लगाते हुए सरकारों से अपना हक लेने की हुंकार भरती रहीं।
प्रदर्शन को समर्थन देने पहुंचे सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के सुभाष लांबा ने कहा कि जुमलों और झूठ की मोदी-खट्टर की सरकार कहती है कि आशा वर्करों को प्रतिमाह 19800 रुपये मानदेय दिया जाता है जबकि सच्चाई यह है कि उन्हें हरियाणा के न्यूनतम वेतन यानी 18,260 रुपये प्रति माह के चौथाई से भी कम मात्र 4000 रुपये ही मिलता है। वर्कर बीते 42 दिन से अपनी मांगों के लिए संघर्षरत हैं, केंद्रीय मंत्री किशन पाल गूजर के बेटे देवेंद्र ने आशाओं की बात मंत्री तक पहुंचाने का वादा किया था लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। आशा वर्कर यूनियन की फरीदाबाद जिला अध्यक्ष हेमलता ने कहा कि सरकार 40 से अधिक सेवाएं आशा वर्करों से लेती है लेकिन केवल 15 का ही भुगतान किया जाता है। शिशु के जन्म से लेकर पंद्रह महीने तक उसकी स्वास्थ्य देखभाल, पूरे टीके लगवाने के बाद ही 250 रुपये मिलते है यानी सवा साल इंतजार के बाद, इसी तरह गर्भवती महिला के प्रवस होने तक तीन बार घर पर विजिट कर उसके टीकाकरण और स्वास्थ्य रिपोर्ट देने के बाद ही 250 रुपये मिलते हैं, इससे ज्यादा धन तो बार बार विजिट करने और रिपोर्ट तैयार करने में खत्म हो जाता है।
पलवल की अध्यक्ष रामरती ने कहा कि आज प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री हर मंच पर भारत की बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा करते हैं उसके पीछे महज चार हजार रुपये में खटने वाली यही आशा वर्कर हैं। आशा वर्करों के कारण ही मातृ-शिशु मृत्यु दर कम हुई है, टीकाकरण का लक्ष्य हासिल किया गया है, गर्भवती महिलाओं में आयरन- कैल्शियम की समस्या खत्म हुई है, बावजूद इसके हमारी जायज मांगें नहीं सुनी जा रहीं।
फरीदाबाद की जिला सचिव सुधा ने कहा कि अनिल विज कहते हैं कि देश में आशा वर्करों को सर्वाधिक चार हजार रुपये मानदेय हरियाणा में ही दिया जाता है इसलिए और नहीं बढ़ाया जा सकता। हरियाणा में तो न्यूनतम मजदूरी ही 18260 रुपये है वह भी प्रतिदिन आठ घंटे काम के लिए। आशा वर्कर तो चौबीस घंटे मुस्तैद रहती हैं बावजूद उन्हें केवल चार हजार रुपये मानदेय। इसमें भी सरकार खेल कर रही है मानदेय बढ़ाया तो इंसेंटिव राशि खत्म कर दी।
इस दौरान गुस्साई आशा वर्करों ने मर गया मोदी हाय हाय, मर गया खट्टर हाय हाय, मर गया अनिल विज हाय हाय, जोर से रोओ हाय हाय के नारे लगाकर सरकारों को कोसा। बडख़ल फ्लाईओवर के नीचे करीब एक घंटे प्रदर्शन करने के बाद लाल सैलाब केंद्रीय मंत्री किशन पाल गूजर के आवास की ओर बढ़ चला। रास्ते भर गगन भेदी नारे लगाते हुए कि आधी रोटी खाएंगे सरकार को झुकायेंगे, हमारी मांगे पूरी करो, पिंक पिंक लहराएगा होश ठिकाने आएगा, इंसेंटिव नहीं वेतन दो, सरकारी कर्मचारी का दर्जा दो। चार हजार में दम नहीं 26 हजार से कम नहीं के गगनभेदी नारे लगाते हुए काफिला आगे बढ़ा तो इस लाल आंधी को देखने के लिए हर कोई ठहर गया।
पुलिस ने केंद्रीय मंत्री किशन पाल गूजर के आवास से काफी पहले ही बैरिकेडिंग कर रखी थी मानो वह जन प्रतिनिधि नहीं कोई सामंत हों। सुभाष लांबा और सुनीता पुलिस अधिकारियों से भिड़ गए और जबरन बैरिकेड हटवाए गए। आवास पर केंद्रीय मंत्री के पीए बाटला मिले और उन्होंने सबसे पहले तो यही नाराजगी जताई कि प्रदर्शनकारियों को मंत्री के आवास तक कैसे आने दिया गया। इसके बाद उन्होंने सुभाष लांबा को बताया कि संसद का विशेष सत्र चल रहा है पार्टी व्हिप जारी होने के कारण मंत्री जी नही आ सकते, आप लोगों की बात मंत्री तक पहुंचा दी जाएगी। सुभाष लांबा ने कहा कि बिना मंत्री से बात किए हम नहीं हटेंगे, फोन पर बात कराई जाए।
बाटला ने संसद में जैमर होने का हवाला देते हुए असमर्थता जताई और 22 सितंबर को आशा वर्कर यूनियन के चुने हुए प्रतिनिधिमंडल से बात कराने का वादा किया। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्रीय मंत्री आशा वर्करों की मांग को गंभीरता से नहीं लेंगे और टाल मटोल करते रहे तो आने वाले लोकसभा चुनाव में हर गांव में आशा वर्करों का दल उनके विरोध में जनता को जागरूक करने का काम करेगा। अंत मेें तय हुआ कि 22 सितंबर को केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कर अपनी बातें रखी जाएंगी, मांगे पूरी नहीं होने पर हड़ताल जारी रखी जाएगी। इस मौके पर सिटू के निरंतर पाराशर, फरीदाबाद से सुधापाल, रजनी, सुशीला चौधरी, रेखा शर्मा, पूजा गुप्ता, नीलम जोशी, चंद्रप्रभा, रजनी, संगीता, पलवल से बाला उपप्रधान, सरोज, जगवती, बब्ली आदि पदािधकािरयों के साथ हजारों आशा वर्कर मौजूद रहीं।