डॉ. रामवीर सच औ झूठ में छिड़ी हुई है बहुत दिनों से लड़ाई सच बेचारा एकाकी है झूठ के हैं कई भाई। एक ओर टीवी पे अकेला आता दिखे रवीश
डॉ. रामवीर केवल पवन नहीं अब मन भी हो गया इतना अधिक प्रदूषित बात करें तो मुख से प्राय: वचन निकलते अतिशय दूषित। मन में विष तो और भी होगा
डॉ. रामवीर अन्धे हो इसलिए भक्त हो अथवा भक्ति से हुए अन्धे अन्धेपन से बढती भक्ति भक्ति से बढते हैं अन्धे । अन्धेपन एवं भक्ति में अन्योन्याश्रय का सम्बन्ध अन्धा
डॉ रामवीर या तो मैं कविता लिखता हूं या लिखता हूं व्यंग्य इन दो से ही मेरे दोस्त हो जाते हैं तंग। तंग हरेक नहीं होता है कुछ होते हैं
डॉ रामवीर तेरी मुझको नहीं माननी तू ही मेरी मान दुराग्रह ही अन्धभक्तों की है असली पहचान। जो कुछ रटवा दिया है उसका कर देते हैं बखान अन्य किसी की
किसी औरत ने क्यों नहीं उठाई उंगली ..?? तुलसी दास पर, जिसने कहा, ‘ढोल, गंवार, शूद्र, पशु, नारी, ये सब ताडऩ के अधिकारी.’ मैं हैरान हूं, किसी औरत ने क्यों
डॉ. रामवीर कुछ रिश्ते तो टूट गए हैं कुछ हैं टूटने वाले ज्यादातर मित्रों ने मुंह पर लगा लिए हैं ताले। जब टीवी पर पच्चीस एंकर फैलाएं अफवाहें दुष्ट और
डॉ. रामवीर फैला रहे हैं लोग पुरानी कुछ वैसी ही बातें देश विभाजन में की गई थीं जैसी खुराफातें। बढ़ा रहे हैं उग्र घृणा के भडकीले कुविचार अन्धों को दिखती
डॉ. रामवीर धर्मध्वजी कुपढ संन्यासी दे रहे हैं व्याख्यान मानव द्वारा मानवता का हो रहा है अपमान। महामूढ हठी अनपढ भी कहलाते विद्वान् बदल रहे हैं आज देश में सारे
डॉ. रामवीर देश दशा को देख मेरा मन रहता प्राय: खिन्न जो सच्चाई नहीं जानते वे दिखते हैं प्रसन्न। बुरे काम का बुरा नतीजा इस पर है विश्वास और उधर