डॉ. रामवीर केवल पवन नहीं अब मन भी हो गया इतना अधिक प्रदूषित बात करें तो मुख से प्राय: वचन निकलते अतिशय दूषित।
मन में विष तो और भी होगा वाणी में सारा न समाता अमृतकाल में देश का नेता घोर विषैले गीत सुनाता ।
नेताओं व बाबाओं ने आपस में कर ली है सन्धि दोनों धड़ाधड़ झूठ बोल कर देश में ला रहे झूठ की आंधी।
देश स्वतन्त्र हुए को होने वाले हैं अब अस्सी साल फिर भी छोटी छोटी बातों पर क्यों उठता रोज बवाल।
अनावृष्टि के कारण पहले पड़ जाया करता था अकाल वह अकाल होता था अन्न का अब बुद्धि का पड़ा अकाल।
भारत मां की जय तो बोलते पर भारत मां की न मानते जनता ही भारत माता है उसे ये कल्पित देवी जानते।
आशंका है सत्ता मद में कर न बैठें भारी गलती महाभारत तब ही होता विदुर जैसों की जब न चलती।