डॉ. रामवीर जो भी सत्ता में आता है हो जाता है वही घमंडी जैसी पहले कांग्रेस थी वैसी ही भाजपा पाखंडी। जनता को बहला फुसला कर तरह तरह के स्वप्न
डॉ. रामवीर पहले मैं कविता लिखता था मित्र पढा करते थे कभी कभी औदार्यपूर्वक श्लाघा भी करते थे। अब माहौल और है जैसे हवा ही गई बदल कविता क्या कवि
डॉ. रामवीर आज एक पुराने मित्र का फोन आया – क्या करते रहते हो? ‘झाडू लगाता हूं’ मैंने कहा। ‘झाडू लगाते हो ! कमाल है कोई मेड/हैल्पर नहीं रख सकते?’
डॉ. रामवीर मैं भी प्यार करने वाला हूं मैं हूं नहीं निरा आलोचक मुश्किल है कि कहां से लाऊं बंदा जो हो प्यार के लायक। आज देश में बने हुए
डॉ. रामवीर प्यार बांटते बांटते उमर बिताई पूरी जिन पे लुटाया वे भी देखा रखने लगे हैं दूरी। हमें पता है उन बेचारों की है जो मजबूरी उनको सारी जानकारियां
डॉ. रामवीर यूं तो तीन माह पूर्व अमेरिका के केलिफोर्निया में लगी आग से दुनिया का ध्यान पहले ही आग केन्द्रित था, अब दिल्ली उच्च न्यायालय के जस्टिस यशवन्त वर्मा
डॉ. रामवीर जैसी पोस्ट्स पढ़ते हैं आप और बनाते जैसे दोस्त धीरे धीरे हो जाते हैं जैसे खाने लगे हों पोस्त। अवचेतन में गहरे बैठे जगा दिए जाते हैं गोस्ट
डॉ. रामवीर स्वास्थ्य के दृष्टिगत पारिवारिक चिकित्सक ने चिन्ता न करने का परामर्श दिया है। दुर्भाग्य है कि जन्मना देशभक्त होने के कारण देश में कहीं भी कुछ बुरा घटता
डॉ. रामवीर हम को हठी समझ लेते हैं कुछ अबोध सज्जन क्योंकि उनकी अनुचित बातें हम न करते सहन। हठ नहीं अपितु स्वाभिमान है करें न खल-वन्दन हम साधारण काठ
डॉ. रामवीर यूं तो सब सामान्य है किन्तु फिर भी मन रहता है उदास देश की बिगड़ी दशा देख कर प्राय: हो जाता हूं निराश। एक नागरिक के नाते मैं