डॉ. रामवीर गहन वेदना होती है जब सच होता है घायल, किसी पन्थ का नहीं मैं केवल सच का ही हूं कायल। ‘सत्यमेव जयते’ कहते पर करें असत्य की पूजा,
डॉ. रामवीर औरों जैसा ही हो जाना लक्ष्य नहीं मेरे जीवन का, जब मैं स्वयं सोच सकता हूं क्यों पिछलग्गू बनूं किसी का। कुछ पा जाने की चाहत में निशदिन
डॉ. रामवीर जनता के जगने की सारे नेता करते रहते प्रतीक्षा, किन्तु स्वयं सोए रहते हैं अपनी करते नहीं समीक्षा। जो नेता सार्वजनिक मंच से बेशर्मी से झूठ बोलता, जनता
डॉ. रामवीर लोकतन्त्र में लोक की ही जब सुनी न जाय इससे बडा बताइए क्या होगा अन्याय। राजनीति में देश की खुला नया अध्याय सब साधन संचार के सत्ता के
डॉ. रामवीर नेता हों या होवें पुजारी सब के सब हो गए व्यापारी, राजनीति में और धर्म में घुसे हुए हैं कारोबारी। नेताओं को नहीं दीखती बेबस जनता की लाचारी,
डॉ. रामवीर समझाने वाले ज्यादा हैं और समझने वाले कम, इस हालत में दिल की बातें कैसे किसे सुनाएं हम। अब संवाद नहीं होता है बहस वास्ते ठोकें खम, लगता
डॉ. रामवीर जिन दोनों ने अंग्रेजों की नाक में डाली नकेल, गुजरात में ही जन्मे थे गान्धी और पटेल। किन्तु उसी में जन्मा जिन्ना औ फिर जन्मा मोदी, जिन्ना ने
डॉ. रामवीर हां जी हां जी करते जाने का हो सका न आदी, ठकुरसुहाती की गठरी भी कभी न सर पे लादी। जो जैसा है उस को वैसी खरी खरी
डॉ. रामवीर आजकल कुछ पढऩा या वीडियो आदि देखना शुरू करें तो अधिकतर की शुरुआत डिस्क्लेमर से होती है। डिस्क्लेमर का आजकल वही स्थान है जो पुराने काव्यों में मंगलाचरण