डॉ. रामवीर गहन वेदना होती है जब सच होता है घायल, किसी पन्थ का नहीं मैं केवल सच का ही हूं कायल।
‘सत्यमेव जयते’ कहते पर करें असत्य की पूजा, इससे बड़ा कोई आडम्बर और क्या होगा दूजा।
नेताओं को सच के वध से नहीं कोई परहेज़, इनके भी हैं कर्म वही जो करते थे अंग्रेज़।
साम-दाम और दण्ड-भेद की नीति बहुत पुरानी, इसके विषय में एक जरूरी बात है याद दिलानी।
उक्त उपाय चतुष्टय बरता जाता था दुश्मन से, इनका प्रयोग नहीं करणीय देश में ही स्वजन से।
देशवासियों में ही भेद के बीज जो नेता बोते, वे नायक के रूप में असली खलनायक ही होते।
पैंतीस एक के नारे लगाने वालों की देशभक्ति, देख के हम को तो होती है राजनीति से विरक्ति।
न्याय मांगने वालों को जो दण्ड द्वारा डराते, समय बदलने पर वे शासक करनी पर पछताते।