फरीदाबाद (म.मो.) दिनांक दो सितम्बर को हरियाणा सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी फरीदाबाद के नये पुलिस आयुक्त तैनात किये गये हैं। फिलहाल वे दक्षिण हरियाणा रेंज रेवाड़ी के आईजी पद पर तैनात थे। ये यहां ओम प्रकाश सिंह का स्थान लेंगे जिन्हें एडीजीपी स्टेट क्राइम नियुक्त किया गया है। कायदे से तो विकास अरोड़ा को तीन सितम्बर को ही यहां का चार्ज ले लेना चाहिये था, लेकिन उन्हें ऐसी कोई जल्दी नहीं रहती; वे यहां चार्ज लेने तभी आयेंगे जब ओपी सिंह यहां से अपना ‘हिसाब-किताब समेट लेंगे।
नये सीपी विकास अरोड़ा से शहरवासी उम्मीद करते हैं कि वे बीते डेढ साल के दौरान रसातल में समा चुकी पुलिस की छवि को बेहतर करने का प्रयास करेंगे। उनसे आशा की जाती है कि वे थाने-चौकियों की नीलामी न करके गुणवत्ता के आधार पर तैनातियां करेंगे। नोट छापने के उद्देश्य से जो पुलिसकर्मी शराब व अन्य मादक पदार्थों के धंधे से जुड़े हैं, उनके साथ सख्ती से निपटेंगे। थाने-चौकियों में जनता की लुटाई-पिटाई के बजाय उनकी ठीक से सुनवाई होगी और उन्हें न्याय मिल सकेगा। कहावत है कि जो न्याय चौकी का हवलदार दे सकता है वह न्याय भारत का मुख्य न्यायाधीश भी नहीं दे सकता। इसके लिये केवल महकमे वालों की नीयत साफ होनी चाहिये।
आशा की जाती है कि जि़ले में मौजूद करीब दर्जन भर क्राइम यूनिटें अपराधियों से सांठ-गांठ करने के अपेक्षा अपराध एवं अपराधियों को नियंत्रित करने की ओर ध्यान देंगी। अभी तक ये यूनिटें शहर की गलियों में अधिकृत शराब की दुकानों, सट्टे व जुए के ठिकानों को सूंघते फिरते हैं। इसके अलावा स्क्रैप डीलरों से नियमित उगाही करना भी ये अपना कानूनी अधिकार समझते हैं। इनकी इस ऊर्जा को अपराध नियंत्रण की ओर मोड़ा जाय तो बेहतर परिणाम निकल सकते हैं। दरअसल, समझने वाली बात ये है कि जो पुलिसकर्मी पैसे देकर तैनाती पायेगा और उसके बाद नियमित भुगतान अपने आकाओं को करता रहेगा तो लूट-मार तो वह करेगा ही। आशा है कि कृष्णभक्त अरोड़ा इस व्यवस्था को बदलने का प्रयास तो करेंगें ही।