डॉ. रामवीर लोकतन्त्र में लोक की ही जब सुनी न जाय इससे बडा बताइए क्या होगा अन्याय।
राजनीति में देश की खुला नया अध्याय सब साधन संचार के सत्ता के गुण गाय।
देशहित में यदि कोई मुद्दा कभी उठाय तो बहुमत के गर्व में नेता दे ठुकराय।
वाणी सन्त कबीर की मन में लिओ बिठाय दुर्बल को न सताइए ताकी मोटी हाय।
दूनी गति से बढ़ रही धनपतियों की आय निर्धन का खप जाए है जितना रोज कमाय।
नेता तो चालाक है जनता सीधी गाय सूखी घास खिलाय के दूध दूह ले जाय।
पांच साल में एकदा नेता मुख दिखलाय उसके बाद मजाल है खोजे भी पा जाय।
राजनीति में वह सफल जो ज्यादा बहकाय अपना मतलब सिद्ध हो प्रजा भाड़ में जाय।
ऊंच नीच व्यवहार की सब को दी समझाय हित की बात नहीं सुने उसका नहीं उपाय।
जो कहना था कह दिया भले न सबको भाय सब स्वतन्त्र हैं वह करें जैसी जिसकी राय।