डॉ. रामवीर
मैं भी प्यार करने वाला हूं मैं हूं नहीं निरा आलोचक मुश्किल है कि कहां से लाऊं बंदा जो हो प्यार के लायक।
आज देश में बने हुए हैं जो व्यक्ति लोगों के नायक उनकी करतूतें मुझको तो लगती रहीं परम दुखदायक।
कौन कौन सी घटना गिनाऊं हो जाएगी लम्बी सूची करा धरा कुछ नहीं परन्तु डींगें लम्बी लम्बी फेंकीं।
काश देश के नेता जानते क्या चाहती है वंचित जनता इनके जहन में तो हर वक्त बस चुनाव ही चलता रहता।
किसे कहां से खड़ा करें और किसकी खडी करवाएं खटिया चौबीस घंटे दाव पेंच की राजनीति होती है घटिया।
टीवी पर चलता है निरन्तर चौबीस घंटे कोरा झूठ जिसके श्रोता मेरे मित्र मुझसे प्राय: जाते रूठ।
इसमें मेरी नहीं है गलती मित्रों का भोलापन कारण भोले शीघ्र बहक जाते हैं दे सकता हूं कई उदाहरण।
शायद अपनी किस्मत खोटी मुश्किल है मित्रों को मनाना जागृत जन परिचित हैं आजकल पोस्ट ट्रुथ का ही है जमाना।
डेढ़ बजे रात्रि में जागा फिर चिन्ता में नींद न आई मुझे स्वप्न में भारत माता चिन्तित दुखिया सी दी दिखाई।