‘गोरक्षकों’ द्वारा सुपारी लेकर आर्यन की हत्या किए जाने की भी चर्चा गर्म है। इन चर्चाओं में कितनी सच्चाई है ये तो जांच का विषय है लेकिन घटना के तथ्य तो दाल में कुछ काला होने की ओर इशारा कर रहे हैं। जानकारों के अनुसार केवल कृष्ण गुलाटी का बेटा सागर उर्फ शैंकी आपराधिक प्रवृत्ति का है, वह अवैध हथियारों की सप्लाई करने के साथ सूदखोरी का काम भी करता है, लोगों से वसूली करने के लिए उसने गैंग भी बना रखा है, उस पर हत्या का प्रयास सहित कई मुकदमे दर्ज हैं। बताते हैं कि उसने मृतक के पिता सियानंद मिश्रा से 4 लाख 90 हज़ार रुपये लिए थे। जिसके बदले उसने अपने घर का एक फ्लोर उन्हें दे रखा है। तय हुआ कि जब तक मिश्रा परिवार रहेगा तब तक वह किराया नहीं देगा और शैंकी ब्याज नहीं देगा। जब मिश्रा परिवार पैसा लेगा तो उसे घर छोडऩा पड़ेगा।
शैंकी की आपराधिक गतिविधियों के कारण आए दिन पुलिस उसके घर पर दबिश देती रहती है, यही नहीं उसके विरोधी पीयूष भाटिया और योगेश राजपूत उर्फ विकु भी चढ़ाई करते रहते हैं। इस कारण सियानंद मिश्रा वह घर छोडऩा चाहते थे। वह शैंकी और केवल कृष्ण गुलाटी से अपनी रकम मांग रहे थे। गुलाटी परिवार को मालूम था कि उनकी बदनामी के कारण कोई भी उनके यहां किराए पर रहने नहीं आएगा, इसलिए वह रकम लौटाना नहीं चाह रहे थे। शैंकी अवैध हथियार कहां छिपाता है और क्या आपराधिक गतिविधियां करता है, सियानंद मिश्रा ने कुछ हद तक इसकी जानकारी पुलिस को दी थी। शैंकी सियानंद को रुपये लौटाना नहीं चाहता था और जब उनके द्वारा मुखबिरी की बात पता चली तो उसने सबक सिखाने की साजिश रच डाली।
उसने पुलिस और प्रशासन में अच्छी पकड़ रखने वाले गोरक्षकों के आवरण में अपराधी अनिल कौशिक को आर्यन की हत्या की सुपारी दी। इस तरह वो एक तीर से दो निशाने लगाना चाहता था, कि हत्या तो गोरक्षक करेंगे लेकिन इज्लाम विरोधी पीयूष भाटिया और योगेश राजपूत पर लगा कर उन्हें जेल भिजवा देगा, लेकिन चाल में कामयाब नहीं हो सका, गदपुरी टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरों मेें हत्यारों की कार का नंबर रिकॉर्ड होने के कारण पुलिस उन तक पहुंच गई।
सियानंद मिश्रा के अनुसार आर्यन अक्सर गुलाटी के बेटे हर्षित के साथ सोने ऊपरी मंजिल पर स्थित उसके कमरे में चला जाता था। 23 अगस्त की रात भी आर्यन हर्षित के कमरे में सोने गया था। रात करीब साढ़े तीन बजे उन्हें सुजाता गुलाटी, हर्षित, शैंकी आदि ने फोन बताया कि आर्यन को पियूष भाटिया, योगेश राजपूत उर्फ विकु व उसके साथियों ने गोली मार दी है। वह उसी समय एसएसबी हॉस्पिटल पहुंचे तो कुछ देर बाद एक एंबुलेंस से घायल आर्यन को लाया गया, उसके सिर और गर्दन में गोली लगीं थीं, एंबुलेंस में सुजाता गुलाटी, कीर्ति शर्मा भी थे लेकिन उन्हें खरोंच तक नहीं थी। आर्यन की इलाज के दौरान मौत हो गई। शैंकी आदि के बहकावे में आकर सियानंद मिश्रा ने पीयूष भाटिया और योगेश राजपूत उर्फ विकु के नाम एफआईआर में लिखवा दिए जो गलत थे।
इधर हर्षित और उसके भाई सागर गुलाटी उर्फ शैंकी ने पुलिस को बताया कि वो लोग रात में मैगी खाने निकले थे। ओल्ड फरीदाबाद के पास स्थित एक मॉल में मैगी खाकर सब लोग लौट रहे थे कि सेक्टर 21 बी स्थित सीमा त्रिखा के घर के पास एक कार जिस पर पुलिस की लाल-नीली फ्लैशर लाइट फ़्लैश कर रही थी, ने उन्हें ओवरटेक कर रोकने का प्रयास किया। कार चला रहे शैंकी के अनुसार उसे लगा कि योगेश राजपूत आदि से लड़ाई के मामले में पुलिस उसे पकडऩे के लिए पीछा कर रही है तो उसने अपनी डस्टर भगा दी। जबकि हक़ीक़तन उसे मालूम था कि नकली पुलिस गाड़ी में उसके द्वारा तय किए गए सुपारी किलर हैं।
इसी दौरान पुलिस आवरण में कथित गोरक्षकों ने उसकी कार पर एक फायर किया, तब उसने कार अनखीर रोड से बडख़ल पुल की ओर ले जाकर दिल्ली-आगरा हाईवे की ओर भगा दी। कार उनका पीछा करती रही इस पर उसने गदपुरी टोल नाका भी तोड़ दिया लेकिन कुछ दूर चलने पर ही कार सवारों ने गोली चलाई जो चालक की बगल वाली सीट पर बैठे आर्यन की सिर में लगी। इस पर उसने कार रोक दी और उसमें बैठीं सुजाता गुलाटी, कीर्ति शर्मा, हर्षित, शैंकी सब बाहर आ गए। उनके मुताबिक कार से उतरे लोगों ने आर्यन को एक गोली मारी जो उसकी गर्दन में लगी। इसके बाद हमलावर बिना कुछ कहे वहां से भाग गए।
पुलिस ने जांच की तो पियूष भाटिया और योगेश उर्फ विकू का हाथ हत्याकांड में नहीं पाया गया। सवाल उठता है कि यदि पीयूष आदि ने हत्या नहीं की थी तो हर्षित, शैंकी आदि ने आर्यन के पिता को यह क्यों बताया कि उन लोगों ने पीछा कर गोली मारी? दूसरी बात यदि पीयूष भाटिया होता तो वह आर्यन को गोली क्यों मारता जिसे वो पहचानता भी नहीं, जबकि उसके सामने शैंकी ही खड़ा था। रही बात गोरक्षकों की तो जब उन लोगों के सामने कार से दो महिलाएं और दो युवक बाहर निकले तब बिना पूछताछ और जांच किए उन्होंने कार के अंदर घायल पड़े आर्यन पर ही गोली क्यों चलाई? यदि गोरक्षक होते तो कार से महिलाओं को उतरते देख घायल पड़े आर्यन को दूसरी गोली नहीं मारते और सच्चाई जानने का प्रयास करते। स्पष्ट है कि वो केवल आर्यन की ही हत्या करने आए थे।
यह भी चर्चा है कि आर्यन हर्षित गुलाटी परिवार का कोई गहरा राज जान गया था, जो इस परिवार की बदनामी का कारण बन सकता था, इसलिए भी गोरक्षकों के भेष में भाड़े के हत्यारों के जरिए उसे रास्ते से हटवा दिया गया। इन चर्चाओं में कितनी सच्चाई या झूठ है मज़दूर मोर्चा इसकी न तो पुष्टि करता है और न ही खंडन, लेकिन पुलिस को इस कोण पर भी जांच करनी चाहिए।