डॉ. रामवीर
हम को हठी समझ लेते हैं कुछ अबोध सज्जन क्योंकि उनकी अनुचित बातें हम न करते सहन।
हठ नहीं अपितु स्वाभिमान है करें न खल-वन्दन हम साधारण काठ नहीं हैं हम तो हैं चन्दन।
जिसमें दिखी सचाई उसी का करते अनुमोदन दुर्योधन के नहीं विदुर के घर करते भोजन।
हम याचक बन कर न करते कोई आवेदन नहीं स्वार्थवश करें किसी के चरणों का सेवन।
हम ने धन को नहीं गुणों को केवल किया नमन गुणियों की श्लाघा में मन से गाये मधुर भजन।
पूरी तरह निभाया जिस को जो भी दिया वचन उसे दिया सम्मान कि जिस की बातों में हो वजन।
यदि कोई दर्पान्ध हमारा करता है तर्जन तो बदले में उसे भी सुनना पडता है गर्जन।
सबल शत्रुओं के सम्मुख भी खडे हुए हम तन हर हालत में हम ने बचाया अपना बांकापन।