डॉ. रामवीर प्यार बांटते बांटते उमर बिताई पूरी जिन पे लुटाया वे भी देखा रखने लगे हैं दूरी।
हमें पता है उन बेचारों की है जो मजबूरी उनको सारी जानकारियां मिलतीं आधी अधूरी।
अर्धसत्य को सत्य समझना कुछ लोगों की आदत भावनाएं आहत हो जातीं बुद्धि न होती आहत।
फेक न्यूज भी ड्रग जैसी है पड़ जाती है बुरी लत छूटे नहीं छूटती औ फिर बिगड़ जाती है सेहत।
हमने जिस को भी समझाया अपना शत्रु बनाया ‘मा फलेषु कदाचन पढ़ अपना फर्ज निभाया।
कविता मानो खड़ी रहती है मेरे दरवाजे पर दस्तक दिए बिना आ जाती यूं ही घर के अन्दर।
कविता को क्या कहें यहां तो पी एम मोदीजी भी बिना बुलाए जा पहुंचे थे नवाज शरीफ के घर।