डॉ. रामवीर श्वान फिर समाचारों में है। इस बार सर्वोच्च न्यायालय के सौजन्य से। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला ने स्वत: संज्ञान लेते हुए (स्यूओ मोटो) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को आवारा कुत्तों से रहित करने का आदेश दिया है। सोशल मीडिया में जहां कुछ लोग इससे प्रसन्न हैं तो वहीं अन्य लोग इसे श्वान के प्रति इन्सान की ज्यादती मान रहे हैं। इन्सान इन्सान के साथ ही अमन चैन से रहना नहीं सीखा, दूसरे जीवों के साथ कैसा व्यवहार करे इस पर भला कैसे एकमत होगा, लिहाजा कई प्लेटफॉम्र्स पर कुक्कुर कथा चल रही है। एक बार सरदार खुशवन्त सिंह ने अपने कॉलम में मानवजाति को दो हिस्सों में बंटा बताया था – डॉग लवर्स और डॉग हेटर्स। गुट निरपेक्षता का तीसरा विकल्प सरदार जी ने रखा ही नहीं था। खुशवन्त सिंह स्वयं डाई हार्ड डॉग लवर था इसलिए इन हर्ट ऑव हर्ट शायद सारी दुनिया को डॉग लवर ही देखना चाहता था बतर्ज मेनका गांधी।
लेखक पुरानी गुट निरपेक्ष नीति का समर्थक रहा है इसलिए इस श्वान और इन्सान मामले में भी तटस्थ है। लव/हेट वाले हाई लाइनर्स ‘जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध'(राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर) उद्धृत करते हुए मेरी निन्दा कर सकते हैं, उन्हें स्मरण करा दूं कि इन्हीं दिनकर जी ने ‘श्वानों को मिलता दूध दही भूखे बच्चे अकुलाते हैं’ भी लिखा था। वे भी एक तरह की तटस्थता के साथ इतना ही कह रहे थे कि मानव शिशु की कीमत पर कुक्कुर प्रेम को अधिमान न दिया जाए।
कुत्ते के बारे में आदमी अतिवादी रहा है। जो आदमी वफादारी और प्यार के मामले में कुत्ते को बेस्ट फ्रेंड कहता है और ‘The more i Learn about People the more I love my dog, (Mark Twain) जैसी तारीफ करता है वही जब किसी पर गुस्सा करता है तो उसे कुत्ता कह कर गरियाता है। कुत्ते के बारे में सबसे अच्छी बात लेखक को यह लगती है कि उसे सब तरह की ट्रेनिंग दी जा सकती है पर धर्मान्ध नहीं बनाया जा सकता। कल्पना कीजिए यदि कट्टरवादियों की चलती तो कुत्ते को भी हिन्दू कुत्ता और मुस्लिम कुत्ता बना देते। हिन्दू कुत्ता केवल मुसलमान को काटता और मुस्लिम कुत्ता हिन्दू को। सेक्युलरिज्म की कितनी ही आलोचना करो कुत्ता सेक्युलर ही रहेगा, धर्मानुसार काटने की कट्टरता तक नहीं गिरेगा। हर मसले पर धर्म की राय जानने के इच्छुक नोट करें कि भगवद्गीता में ‘विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि, शुनि चैव श्वपाके च पण्डिता: समदर्शिन:।’ (ब्राह्मण गाय हाथी कुत्ता और चाण्डाल – सभी के बारे में विद्वान् समदर्शी होते हैं) कह कर कुत्ते को बराबरी पर रखा है, न निम्न और न उच्च।
इस्लाम में भी कुत्ते को पूरी तरह हराम नहीं मकरूह (नापसंद) बताया है। नापसंद से मतलब ज्यादा लाड प्यार वाली पैंपरिंग न करने से है। स्थानाभाव से कुक्कुर कथा का उपसंहार करना पड रहा है वैसे विस्तार का अवकाश (स्कोप) है।