डॉ. रामवीर सबकी अपनी अपनी समझ है सबकी अपनी अपनी बुद्धि बहुत कठिन है मन में गहरे बैठे विश्वासों की शुद्धि। सबके अपने अपने भय हैं सबकी अपनी अपनी भ्रान्ति
डॉ. रामवीर चौबीस घंटे सातों दिन जो नफरत में ही रत रहते सम्भव नहीं उन्हें समझाना यही सोच कर हम चुप रहते। फिर भी हद हो जाती है तो मन
डॉ. रामवीर राजनीति बाजार है नेता दुकानदार जनता खरीददार है लुटती बारम्बार। राजनीति है आदमी का ऐसा हथियार जिससे करता आदमी आदमी का शिकार। राजनीति भी रोग है लक्षण इसके
डॉ. रामवीर अमृत काल में कुछ लोगों की इतनी कम हो गई बिनाई जो हो रहा है खुल्लम-खुल्ला वो भी देता नहीं दिखाई। न्यायालय में न्याय न मिलता विद्यालय से
डॉ. रामवीर सच औ झूठ में छिड़ी हुई है बहुत दिनों से लड़ाई सच बेचारा एकाकी है झूठ के हैं कई भाई। एक ओर टीवी पे अकेला आता दिखे रवीश
डॉ. रामवीर प्रधानमन्त्री मोदी जब भी अपनी उपलब्धियों पर अपने मुंह मियां मिट्ठू शैली में बोलते हैं मेरी चिन्ता बढ़ जाती है। असल में उनकी उपलब्धियां हाथी के दिखाने वाले
डॉ. रामवीर अन्धे हो इसलिए भक्त हो अथवा भक्ति से हुए अन्धे अन्धेपन से बढती भक्ति भक्ति से बढते हैं अन्धे । अन्धेपन एवं भक्ति में अन्योन्याश्रय का सम्बन्ध अन्धा
डॉ. रामवीर आधी तो लेने में बिताई औ फिर आधी देने में, हम ने सारी उमर लगा दी शिक्षा लेने देने में। जितनी ली थी उसे बढ़ा कर दुगनी कर
डॉ. रामवीर वैसे तो आम आदमी के बहाने खबरों में आम बना ही रहता है। हर नेता हर दल आम आदमी का हितैषी होने का दावा करने की दौड में
डॉ. रामवीर पता नहीं यह नेताओं की कैसी है मजबूरी, दुष्टों से इनकी है निकटता भद्र जनों से दूरी। जब जब आता है चुनाव तब तब राम रहीम, छूट जाता