खबरों में आम

खबरों में आम
August 20 05:27 2024

डॉ. रामवीर
वैसे तो आम आदमी के बहाने खबरों में आम बना ही रहता है। हर नेता हर दल आम आदमी का हितैषी होने का दावा करने की दौड में मिल्खा सिंह के रोल में रहता है। एक चतुर सुजान ने तो अपनी पार्टी के नाम में ही आम बो रक्खा है। यह अलग बात है कि उक्त पार्टी के आम पर जो फल लगते हैं उन्हें खाते खास आदमी ही हैं, यकीन न हो तो आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों का ‘हूज हू’ बांच लीजिए – किसी में भी आम की गन्ध नहीं आएगी, सब में खास की ही खुशबू महकती मिलेगी।

बहकना और बहकाना राजनीति में सामान्य बात है। फलों के राजा आम की बात करने जा रहा था पर बहक गया और आम आदमी की ओर मुड गया। तो वापस आम फल की ओर मुडते हैं। सोशल मीडिया में शोर है कि पाकिस्तान ने राहुल गांधी को आम भिजवाए हैं। समाचार का स्रोत है भाजपा का आईटी सैल, इस लिए पाठक प्रामाणिकता की जांच अवश्य कर लें। भाजपा आईटी सैल का मुख्य काम खबरों को खराब करना है, मनघड़ंत फैलाना या गलत सन्दर्भ में पेश करना।

राहुल गांधी के साथ कुछ मुस्लिम सांसदों के नाम भी जोड़े गए हैं, इन में से इकरा हसन का बयान आया है कि उन्हें ऐसी कोई भेंट नहीं मिली। आईटी सैल यह भूल जाता है कि नवाज शरीफ ने मोदी जी की माता जी को शाल भी भिजवाया था और स्वयं मोदी जी बिन बुलाए नवाज शरीफ को जन्मदिन मुबारक कहने पहुंच गए थे। दोनों ओर से उपहारों का आदान प्रदान चलता रहा है, यह पहली बार हो रहा है जब ऐसी औपचारिकताओं को हिन्दू मुस्लिम रंग में दिखाने की कोशिश की जा रही है। ऐसी हरकतें हास्यास्पद हैं। भाजपा आईटी सैल खिल्ली उडाने के चक्कर में खिल्ली उडवा लेता है। एक बार राजीव गांधी के पितृनाम में फिरोज होने से ही राजीव गांधी को मुस्लिम बताया गया तो कमेंट्स में किसी ने लिखा कि इस तर्क से तो अमित शाह नादिर शाह के खानदान के निकलेंगे !

आम आदमी, आम और राजनीति के घालमेल से निकल कर आम की ओर लौटते हैं। आम हमारा राष्ट्रीय फल है इस लिए सम्मान का पात्र है। यह सेव, चीकू, कीवी, लीची जैसा दूर देश से आकर भारत में बसने वाला नहीं है, भारत की भाषाओं और संस्कृति में समाया हुआ है। संस्कृत में आम के पर्यायवाची हैं –

रसाल, सहकार, अतिसौरभ, कामांग, मधुदूत, माकन्द, पिकवल्लभ आदि। इन नामों में वह शाब्दिक सौन्दर्य है कि कोई चाहे तो बच्चों के नामकरण के लिए भी चुन सकता है। गांवों में आमों के बगीचे अमराइयां लोकगीतों में गूंजती हैं। आज जरूरत है कि आम को आम ही रहने दें, उसे हिन्दू मुस्लिम करने के काम में न लगाएं।

 

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Mazdoor Morcha
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