डॉ. रामवीर जो अपने मुंह से कहता है एक अकेला सब पर भारी, अपने मुंह मियां मि_ू की लगता उसको हुई बीमारी। संस्कृत भाषा में है पुरानी एक कहावत कही
डॉ. रामवीर कोई कितना भी समझाए वे न कतई समझने वाले, जो अपनी बुद्धि कर बैठे स्वार्थी नेताओं के हवाले। नेता अगर नहीं है सच्चा अपने दिए वचन का पक्का,
डॉ. रामवीर बीजेपी में सर्वेसर्वा होते थे अडवानी, दिन बदले तो हुए बेचारे पार्टी में बेमानी । आगे की घटनाएं सभी की हैं जानी पहचानी, अपना पाला पोसा चेला करने