अपार आईडी स्वैच्छिक है तो छात्रों से जबरदस्ती क्यों की जा रही है

अपार आईडी स्वैच्छिक है तो छात्रों से जबरदस्ती क्यों की जा रही है
February 04 00:49 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बेरोजगारी, महंगाई जैसी समस्याएं दूर करने के बजाय सरकारों ने नागरिक पर पहले आधार की अनिवार्यता थोपी। आधार बनवाने की लाइन से मुक्त हुआ तो पैन अपडेट का फरमान सुनाया गया। पैन अभी अपडेट भी नहीं हुआ था कि परिवार पहचान पत्र ले आए। यह सब भी कम पड़ रहा था तो छात्रों पर जबरन अपार आईडी थोपी जा रही है। बोर्ड परीक्षा का समय नजदीक है लेकिन सरकारी और निजी स्कूलों के शिक्षक पढ़ाई करवाने के बजाय छात्रों की अपार (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्रेशन) आईडी बनाने के लिए पसीना-पसीना हो रहे हैं। कहने को तो यह आईडी स्वैच्छिक है लेकिन शिक्षकों पर 100 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन कराने का दबाव है, लक्ष्य नहीं प्राप्त कर पाने वाले शिक्षकों का वेतन रोकने से लेकर अन्य तरह की प्रताडऩाएं दी जा रही हैं।

शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार दिसंबर 2025 तक सौ प्रतिशत अपार आईडी बनाई जानी थीं लेकिन अभिभावकों की अनिच्छा के चलते नहीं बन पाईं। शिक्षकों पर दबाव बनाया गया तो उन्होंने छात्रों को कक्षा से बाहर कर अभिभावकों को अपार आईडी बनाने के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने को मजबूर कर दिया। एक बार फिर 19 जनवरी तक 100 प्रतिशत आईडी बनाने का लक्ष्य रखा गया लेकिन अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है।

एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पढ़ाना लिखाना तो बंद हो गया है, इतना दबाव है कि अपार आईडी के अलावा कुछ सूझता नहीं। स्कूल खुलते ही बताना होता है कि आज कितनी अपार आईडी बनानी हैं, जितना बताओ उससे ज्यादा का लक्ष्य दिया जाता है, दोपहर में फिर सूचना मांगी जाती है कि कितनी बनीं और बाकी बची क्यों रह गई हैं। शाम को स्कूल बंद होते समय बताना होता है कि कितनी अपार आईडी बनीं। बोर्ड परीक्षाएं करीब हैं जबकि अपार आईडी की फटीग से शिक्षा-शिक्षण कार्य ठप सा है।

अपार आईडी का फायदा बताया जा रहा है कि यह एक ऑन लाइन एकेडमिक बैंक की तरह है जिसमें पूरे देश के छात्रों का डेटा होगा। 12 अंक वाली अपार आईडी का लाभ छात्र को बस यात्रा, छात्रावास, मनोरंजन पार्क में सब्सिडी, लाइब्रेरी व संग्रहालयों में निशुल्क प्रवेश और किताब व स्टेशनरी में छूट के रूप में प्राप्त होगा। इसके अलावा अपार आईडी का इस्तेमाल एडमिशन, छात्रवृत्ति, परीक्षा और शैक्षणिक कार्यों के लिए किया जाएगा। उक्त सब गिनाई गई सुविधाएं धोखे के अलावा कुछ भी नहीं है, छात्रों को बस यात्रा, संग्रहालय, लाइब्रेरी, छात्रवृत्ति आदि की सुविधाएं पहले भी मिलती रही हैं और आगे भी मिलती रहेंगी बशर्त कि सरकार की नीयत कुछ देने की हो।
सरकार के दावों को सुनकर तो लगेगा कि अपार आईडी छात्रों के हित में है लेकिन जब सहमति पत्र की लाइनों को पढ़ते हैं तो सरकार की बदनीयती का अंदाज होता है। अगर सरकार सहमति पत्र के अनुसार छात्र के माता-पिता या अभिभावक अपार आईडी बनाने के लिए स्वैच्छिक रूप से उनके आधार, पैन कार्ड, एपिक, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट का इस्तेमाल किए जाने की स्वीकृति दे रहे हैं। इसके अनुसार अभिभावक इससे सहमत है कि समय समय पर छात्र की अपार आईडी जिसमें छात्र के नाम, पता, उम्र, जन्म तिथि, लिंग और फोटोग्राफ दर्ज है, की जानकारी शैक्षणिक क्रियाकलापों में जुड़ी संस्थाओं के साथ साझा की जाएगी। इन संस्थाओं के अलावा अन्य शैक्षणिक संस्थान, रिक्रूटमेंट एजेंसियों व अन्य साझेदारों को भी दी जाएगी। जानकारों के अनुसार अन्य शैक्षणिक संस्थाओं में कॉरपोरेट शिक्षण संस्थान, कोचिंग, डेटा प्रोवाइडर कंपनी कुछ भी हो सकता है। यानी सरकार छात्रों का डेटा बेस तैयार कर बेचेगी, यह चिंता का विषय है।

हालांकि सहमति पत्र में लिखा गया है कि अभिभावक जब चाहे तब अपनी सहमति वापस ले सकते हैं लेकिन तब तक जिन संस्थाओं के साथ डेटा शेयर किया जा चुका होगा उसे वापस नहीं लिया जाएगा। अभिभावक डेटा साझा किए जाने की शर्त से परेशान हैं और इसी कारण अपार का विरोध हो रहा है। लोगों का कहना है कि स्वैच्छिक बता कर जबरन सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं, मना करने पर बच्चों को स्कूल से लौटाया जा रहा है उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है, तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है।

अपार आईडी के खिलाफ अभिभावक तो लड़ रहे हैं लेकिन खुद को समाजसेवी कहने वाले और सेवा का ढिंढोरा पीटने वाले कथित समाजसेवी संगठन इसका विरोध करने सड़क पर नहींं उतर रहे हैं। कोई संगठन सरकार को बताने वाला नहीं कि अपार आईडी बनने से छात्र को अच्छी शिक्षा नहीं मिलेगी, अच्छी शिक्षा के लिए स्कूल, बेहतर संसाधन, पर्याप्त शिक्षण स्टाफ की तैनाती जरूरी है जिस पर सरकार कुछ नहीं कर रही।

एक शिक्षाविद् के अनुसार सरकार शिक्षा क्षेत्र का बजट और नौकरियां लगातार घटा रही हैं। अनेकों स्कूलों को एक करने के नाम पर बंद किया जा रहा है। संघ से दीक्षित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन करने के नाम पर नेशनल एजुकेशन पॉलिसी एनईपी 2020 सभी पर लादना चाहते हैं। इसके तहत सभी स्कूलों में स्मार्ट क्लास बनाए जा रहे हैं जिनमें स्मार्ट बोर्ड पर छात्रों को विषय पढ़ाए जाएंगे। जाहिर है केंद्रीकृत शिक्षा व्यवस्था में रिकॉर्डेड कोर्स पढ़ाए जाने के कारण शिक्षकों की आवश्यकता नहीं रहेगी। शिक्षकों के रिक्त पद नहीं भरे जाने को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। संदर्भवश सुधी पाठकों को बताते चलें कि करीब दो दशक पहले भी स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड से पढ़ाई कराने की योजना लाई गई थी। इसके तहत स्कूलों में बड़े-बड़े मॉनिटर लगाए गए थे और उन्हें चलाने के लिए जेनरेटर भी लगाए थे। न तो जेनरेटर चले और न ही स्मार्ट पढ़ाई हुई। वर्तमान में भी अनेक स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड, बिजली, इंटरनेट की व्यवस्था नहीं है ऐसे में उनमें स्मार्ट पढ़ाई नहीं होने वाली।
जर्मन समाचार एजेंसी डायचे वेले से अपार आईडी के विषय में बात करते हुए इंटननेशनल कमीशन ऑन साइबर सिक्योरिटी लॉ के अध्यक्ष व साइबर लॉ विशेषज्ञ पवन दुग्गल ने कहा कि इसमें कई ऐसी चुनौतियां है जिसके बारे में सरकार अब तक खुल कर बात नहीं कर रही है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अभी भी अनेक राज्य ग्रामीण अंचलों से जुड़े हैं डिजिटल साक्षरता और डिजिटल शिक्षा सभी स्कूलों तक नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में अपार की पारदर्शिता और उपलब्धता पूरी तरह संदिग्ध है। जिन गांवों में अभी पूरी तरह इंटरनेट की सुविधा नहीं मिल पाई है वहां के विद्यार्थियों को यह सुविधाएं नहीं मिल पाएंगी।

वह इससे भी बड़े खतरे से अवगत कराते हैं, उनके अनुसार भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यूआईडीएआई का डेटा पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और आधार का अधिकतर डेटाबेस डार्कवेब पर मौजूद है। यूआईडीएआई साइबर सुरक्षा में सेंध लगने के हर साल औसतन पचास केस दर्ज कराता है, यह सुबूत है कि डेटा सुरक्षित नहीं है।
अपार आईडी में तो आधार से कहीं ज्यादा डेटा और शैक्षणिक दस्तावेज मौजूद होंगे। समझने वाली बात यह है कि अभी तक अपार का कोई पोर्टल या वेबसाइट नहीं बनी है, यानी छात्रों का डेटा किसी सुरक्षित प्रणाली में सिक्योर नहीं है। पवन दुग्गल चिंता जताते हैं कि अगर इस प्रणाली में साइबर सुरक्षा के हवाले से कोई भी चूक होती है तो यह न केवल विद्यार्थियों के जीवन भर की मेहनत के साथ खिलवाड़ होगा बल्कि पूरा सिस्टम धराशायी हो जाएगा।

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Mazdoor Morcha
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