क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा यूं तो हमें बताया जाता है कि मौजूदा संवैधानिक जनतंत्र जनता के लिए जनता का शासन है, लेकिन जब कभी भी देश की जनता का अधिकांश हिस्सा
क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा ‘श्रीकालकाजी लुब्रिकेंट्स’ और ‘शिव स्टील्स’, सेक्टर 24 फऱीदाबाद’ में 16 फऱवरी को हुए भयानक अग्नि कांड में बुरी तरह जले, सभी मज़दूरों को तत्काल आर्थिक मदद एवं
अखिल भारतीय आम हड़ताल (क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा) दिल्ली के 9 राजनीतिक व जन संगठनों का साझा मंच ‘जन अभियान-दिल्ली’ के बैनर तले 12 फरवरी 2026 को अखिल भारतीय आम हड़ताल
क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा’ का तीसरा स्थापना दिवस शानदार ढंग से मनाया गया क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा रविवार 28 सितंबर 2025 सुबह 11 से शाम 6 बजे तक चंद्रिका प्रसाद स्मारक सामुदायिक
क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा 18 सितंबर को, आज़ाद नगर के लोगों ने, जिनमें बड़ी तादाद में महिलाएं शामिल थीं ‘दुर्गा भाभी महिला मोर्चा’ के परचम तले मुजेसर पुलिस स्टेशन पर आक्रोशपूर्ण
क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा 2025 के जनवरी महीने तक गाज़ा में नरसंहार तो चल रहा था, लेकिन भुखमरी नहीं फैली थी। फिलिस्तीनियों के नस्ली सफाए की, इसरायली-अमेरिकी परियोजना को जल्दी से
क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा पश्चिम बंगाल उर्दू अकादमी ने, 27 अगस्त को, कोलकता में एक मुशायरे का आयोजन किया था, जिसकी सदारत करने तथा अपना क़लाम पेश करने के लिए, देश
क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा “सीमा क्षेत्रों में जनसंख्या संतुलन बिगड़ गया है. इससे राष्ट्रीय सुरक्षा का ख़तरा पैदा हो गया है. देश की एकता, अखंडता और विकास के सामने चुनौती पेश
क्रांतिकारी मजदूर मोर्चा यह सवाल, 1920 में हुई, कोमिन्टर्न की दूसरी कांग्रेस में, जर्मनी के कम्युनिस्टों ने पूछा था, इसलिए, लेनिन का जवाब भी, जर्मनी के वामपंथियों के संदर्भ में
क्रांतिकारी मजदूर मोर्चा जब से पता चला था, कि घर से मात्र 1 किमी की दूरी पर, मेवला महाराजपुर गांव में, एक वयो वृद्ध, कॉमरेड महाशय होराम सिंह रहते हैं;