मज़दूर अधिकारों पर हमला और मज़दूरों की जान से खिलवाड़ नहीं सहेंगे

मज़दूर अधिकारों पर हमला और मज़दूरों की जान से खिलवाड़ नहीं सहेंगे
March 04 07:20 2026

क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा
‘श्रीकालकाजी लुब्रिकेंट्स’ और ‘शिव स्टील्स’, सेक्टर 24 फऱीदाबाद’ में 16 फऱवरी को हुए भयानक अग्नि कांड में बुरी तरह जले, सभी मज़दूरों को तत्काल आर्थिक मदद एवं फऱीदाबाद समेत प्रदेश के सभी कारखानों में सुरक्षा ऑडिट, नियमित सेफ्टी मीटिंग कराने, मज़दूरों की जान से खिलवाड़ करने वाले कारखानेदारों को दंडित करने, मज़दूरों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने के महत्वपूर्ण मुद्दों पर, क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा, फऱीदाबाद ने 19 फरवरी 2026 को सुबह 12 बजे, आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन कर सभा की तथा डी सी की माफऱ्त माननीय मुख्यमंत्री, हरियाणा को ज्ञापन सौंपा.

जोरदार नारे लगाते हुए, प्रदर्शनकारी मज़दूर अपने हाथों में लाल झंडों के अतिरिक्त ये तख्तियां भी लिए हुए थे ‘मज़दूर अधिकारों पर हमला नहीं सहेंगे : मज़दूरों की जान से खिलवाड़ नहीं सहेंगे’; ‘सुरक्षा विभाग में ताले लटके हैं, सुरक्षा ऑडिट होने बंद हो, सेफ्टी मीटिंग होनी बंद हो गई: कौन है इसका जि़म्मेदार? मोदी सरकार, सैनी सरकार; मज़दूरों को भी इंसान समझा जाए: उनकी जान की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए; ‘श्रीकालका जी लुब्रिकेंट्स एवं ‘शिव स्टील’ अग्निकांड में जले मज़दूरों के परिवार भूखे हैं’: 2-2 लाख रु की आर्थिक मदद तत्काल दो, शारीरिक नुकसान के अनुरूप 10 से 20 लाख रु तक आर्थिक मदद का बंदोबस्त करो’; उद्योगों में हो रहे अग्निकांड हादसे नहीं संस्थागत हत्याएं हैं: कौन है इसका जि़म्मेदार, मोदी सरकार, सैनी सरकार.

डी सी कार्यालय मुख्य द्वार पर मोर्चा, सभा में बदल गया. ‘उमंग रंगमंच’ के साथियों लालबहादुर सिंह, श्रीकुमार अधिकारी, अर्जुन कुमार अधिकारी तथा विनोद कुमार की अगुवाई में क्रांतिकारी गीतों ने समां बांध दिया और वहां उपस्थित भीड़ को भी प्रदर्शन और सभा का हिस्सा बना दिया. सभा को कामरेड्स नरेश, राजिंदर सिंह, विनोद कुमार, पूजा और सत्यवीर सिंह ने संबोधित किया. अपने उद्बोधन में वक्ताओं ने फऱीदाबाद के उद्योगों में सुरक्षा मापदंडों को मालिकों द्वारा पैरों तले कुचलने से उत्पन्न भयावह स्थिति की तस्वीर खींची. 16 फऱवरी को हुए भयानक अग्निकांड 47 मज़दूर, राहगीर, पुलिस और दमकल कर्मी बुरी तरह जल गए थे. इनमें आधे से ज्यादा मज़दूर गंभीर रूप से जले हैं. घटना के 4 दिन बाद, यह रिपोर्ट लिखे जाते वक़्त भी इनमें से कई मज़दूर आईसीयू में भर्ती हैं. ताज़ा जानकारी के अनुसार एक मज़दूर प्रदीप कुमार और कारखाने के मालिक के बेटे अभिषेक की ईलाज के दौरान मौत हो गई है. गंभीर रूप से ज़ख्मी बाक़ी मज़दूर भी ख़तरे से बाहर नहीं हैं. आग से जला इंसान कई दिन तक भी ख़तरे से बाहर नहीं होता. जान बच भी गई तो सालों काम पर नहीं लौट पाता. किसी तरह जिंदा रहने की ज़द्दोज़हद कर रहे, इन मज़दूरों के घर चूल्हे कैसे जलेंगे, उनके बच्चों की शिक्षा का क्या होगा, हरियाणा की ट्रिपल इंजन सरकार और प्रशासन कोई चिंता नहीं.

‘फैक्ट्री एक्ट, 1948’ की धारा 41 बी में अभी भी लिखा हुआ है कि कारखानों में नियमित रूप से सेफ्टी ऑडिट तथा सेफ्टी मीटिंग्स होने चाहिएं. श्रम विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मज़दूरों की जान कारखानों में सुरक्षित है. हरियाणा सरकार के श्रम कार्यालयों में सुरक्षा विभाग पर ताले लटक रहे हैं. साथ ही श्रम विभाग को सरकारी आदेश हैं, मालिकों की अनुमति के बगैर, कारखानों में जाने की ज़रूरत नहीं. मालिक जो चाहें करने दें. सारा उत्पादन और निर्माण करने वाले मज़दूरों के खून का आखिऱी क़तरा तक निचोड़ लेने की छूट सरकार ने मुनाफ़े के भूखे मालिकों को दे दी है. मज़दूर किन हालात में काम करने को मज़बूर हैं, वे ही जानते हैं. परिस्थितियां विस्फोटक हैं.

1991 के बाद से मज़दूरों का शोषण और भयानक हुआ है और 11 साल के मोदी राज में चरम पर पहुंच गया है. बी के अस्पताल में भर्ती मज़दूरों से भी पैसे की उगाही होने की ख़बर है. मज़दूरों को वहां ऐसा आतंकित किया हुआ है कि वे मुंह भी नहीं खोल पा रहे. अंदर कुछ मज़दूरों की मौत का अंदेशा भी व्यक्त किया जा रहा है. वक्ताओं ने ऐलान किया कि पीडि़त मज़दूरों के परिवारों से संपर्क करने से उन्हें रोका नहीं जा सकता. उन्हें 2-2 लाख रु की तत्काल ज़रूरत है. मज़दूरों को समुचित आर्थिक मदद नहीं मिली और उन्हें भूखे ही घर बैठना पड़ा तो उनके परिवारों को साथ लेकर अगले महीने विशाल प्रदर्शन किया जाएगा और इंसाफ़ मिलने तक डी सी कार्यालय पर धरना दिया जाएगा. डी सी की ओर से तहसीलदार श्री सुमेर सिंह नेज्ञापन स्वीकार किया. साथ ही सभा को संबोधित करते हुए भरोसा दिलाया कि मज़दूरों की तक़लीफ़ों, सुरक्षा संबंधी व्यवस्था चाक चौबंद करने की ज़रूरत से उच्च प्रशासन को अवगत करा दिया जाएगा और मज़दूरों के साथ इंसाफ किया जाएगा. जोशीले नारों के साथ सभा का समापन हुआ.

ज्ञापन में क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा ने ये मांगें की हैं: सभी घायल मज़दूरों के पूरी तरह स्वस्थ हो जाने तक पूरा ईलाज, स्वास्थ्य लाभ की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. सभी घायल मज़दूरों के परिवारों को तत्काल, कम से कम 2 लाख रु की आर्थिक मदद अविलंब दी जाए, जिससे उनके परिवार भूखों ना मरें. बच्चों की शिक्षा ना छूटे. सभी पीडि़त मज़दूरों को 10 लाख से 20 लाख रु तक, जलने की तीव्रता एवं काम से अनुपस्थित रहने के दिनों के अनुरूप आर्थिक मदद मिले. इस अग्निकांड की न्यायिक जांच कराई जाए. कारखाना मालिकों और सभी संबंधित विभागों, जैसे श्रम विभाग, प्रदुषण नियंत्रण विभाग, क्योंकि अत्यंत ज्वलनशील रसायन लापरवाही से रखा हुआ था और नगर निगम की आपराधिक जि़म्मेदारी तय हो, क़सूरवारों को कठोर दंड मिले. प्रदेश के सभी कारखानों में ‘सेफ्टी ऑडिट’ कराया जाए. ‘सेफ्टी कमेटी’ की मीटिंग्स नियमित हों. सभी श्रम क़ानूनों, मर्यादाओं का अनुपालन सुनिश्चित हो. ऐसा ना होने पर गर्मियों में हालात बहुत भयानक हो सकते हैं. सब कुछ, मुनाफ़े के भूखे मालिकों के भरोसे ना छोड़ा जाए. हम बहुत गहरी पीड़ा के साथ आपके संज्ञान में ला रहे हैं कि फऱीदाबाद के कारखानों सुरक्षा के किसी भी मापदंड का अनुपालन नहीं हो रहा. मज़दूर को भी इंसान समझा जाए. उन्हें इंसाफ़ मिले.

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Mazdoor Morcha
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