क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा के सांस्कृतिक मंच, ‘उमंग रंगमंच’ द्वारा रविवार, 29 सितंबर को, शाम 5 बजे सामुदायिक भवन, आज़ाद नगर, सेक्टर 24 में ‘क्रांतिकारी गीत संगीत संध्या’ का एक शानदार कार्यक्रम आयोजित किया गया. शहीद-ए-आज़म भगतसिंह का 117 वां जन्म दिन 28 सितंबर है. उसी दिन, 2022 में, फऱीदाबाद में, मज़दूरों के संघर्षों का जन-संगठन, ‘क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा’ वज़ूद में आया था. कार्यक्रम का संचालन करते हुए, अध्यक्ष कामरेड नरेश ने शहीद-ए-आज़म भगतसिंह के विचारों पर प्रकाश डाला. भगतसिंह और उनके क्रांतिकारी साथी गोरे अंग्रेज़ों से आज़ाद होकर, भूरे देसी पूंजीपतियों की गुलामी स्वीकार करने वाली आज़ादी के लिए शहीद नहीं हुए थे. भगतसिंह का मिशन अधूरा है, उसे पूरा करने के लिए भगतसिंह के विचारों को देश के कोने-कोने में ले जाना होगा.
इस कार्यक्रम की क़ामयाबी का श्रेय निश्चित रूप से, ‘निशांत नाट्य मंच’ के साथी लाल बहादुर सिंह, ओमबीर सिंह तथा श्रीकुमार अधिकारी की टीम को जाता है, जिनके मार्गदर्शन में ‘उमंग रंगमंच’ की टीम तैयार हो रही है. कामरेड्स नरेश और सत्यवीर सिंह के अलावा, अध्यक्ष मंडल में साथी लालबहादुर सिंह तथा ‘सांस्कृतिक पहल’ के साथी राजेंद्र प्रसाद सिंह मौजूद थे. टीयूसीआई, दिल्ली के साथियों, कामरेड्स बिमल, उमाकांत, नायक ने भाग लेकर, मोर्चा सदस्यों का उत्साह बढ़ाया. साथी बिमल जी का संक्षित भाषण बहुत ज़बरदस्त था. लोगों ने तालियों और ज़ोरदार नारों से उनके विचारों पर अमल करने का अपना इरादा ज़ाहिर किया.
गीत-संगीत के उमंगपूर्ण वातावरण का ऐसा समां बंधा कि भोजपुरी लोकगीतों में मज़दूर महिलाऐं भी ख़ुद को शामिल होने से नहीं रोक पाई. शुरुआत भगतसिंह के सबसे प्रिय गीत, ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ से हुई, फिर एक के बाद एक लोकप्रिय गीतों, ‘गुलमिया अब हम नाहीं बजाईबो’, ‘ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के’, ‘लाल झंडा लेकर कॉमरेड आगे बढ़ते जाएंगे’ आदि की श्रंखला दो घंटे तक अनवरत ज़ारी रही, जिसमें गायक और श्रोता एकाकार हो गए. हासिल-ए-महफि़ल था, साथी ओमबीर सिंह का ढोलक पर मनमोहक सुर-ताल बुलंद करना.
‘भगतसिंह छात्र-युवा मोर्चा’ के साथी आशीष ने, बांसुरी पर ऐसी मनभावन धुन छेड़ी कि लोग मंत्रमुग्ध हो गए. साथी प्रकाश ने महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए एक सुंदर गीत प्रस्तुत किया. गांव डूंडसा से दो साथी कार्यक्रम में भाग लेने पधारे थे. साथी कैलाश ने हरियाणवी रागनी से समां बांध दिया और ‘करवा चौथ’ जैसे पाखंड पर तीखा हमला किया. क्राममो के महासचिव कॉमरेड सत्यवीर सिंह ने मोर्चा के दो साल के शानदार सफऱ को लोगों के सामने रखा. दो साल पहले, दो साथियों द्वारा रोपे गए इस पौधे की परवरिश में फऱीदाबाद के मेहनतक़श मज़दूरों और ख़ासतौर पर आज़ाद नगर मज़दूर बस्ती के साथियों ने कभी अकेला नहीं महसूस होने दिया. फऱीदाबाद ही नहीं, बल्कि पलवल, नूंह, गुडग़ांव, रेवाड़ी, झज्जर, रोहतक, सोनीपत आदि जि़लों तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के मज़दूर, ‘क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा’ को अपने संघर्षों का साथी मानकर, समर्थन दे रहे हैं, जुड़ रहे हैं. एक-एक साथी को जोडऩे का सफऱ मुश्किल ज़रूर था, लेकिन बहुत आनंददायक था. अभी मंजि़ल बहुत दूर है, सफऱ लंबा और चुनौतीपूर्ण है, लेकिन मंजिल आंखों से ओझल कभी नहीं होती. आक्रोशपूर्ण नारों के साथ सभा संपन्न हुई. डॉ सुनील पंवार की इस नज़्म को लोगों ने बहुत सराहा।