क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा के सांस्कृतिक मंच, ‘उमंग रंगमंच’ द्वारा रविवार, 29 सितंबर को, शाम 5 बजे सामुदायिक भवन, आज़ाद नगर, सेक्टर 24 में ‘क्रांतिकारी गीत संगीत संध्या’
मैं यह कहानी व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर लिख रहा हूं। भगत सिंह, सुखदेव और मैं कालिज के सहपाठी थे। भगवतीचरण हम लोगों से दो बरस आगे थे। सहपाठी ही
आज जो फ़ासीवाद से नहीं लड़ता, वह भगतसिंह का सही वारिस होने का हक़दार नहीं ‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ हमारे क्रांतिकारी इतिहास का बहुत गौरवशाली अध्याय है. फांसी से महज
फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मुजेसर फाटक से शुरू होकर बल्लभगढ़ तक, रेलवे पटरी के पश्चिम में फैली, आज़ाद नगर मज़दूर बस्ती में, शहीद-ए-आजम भगतसिंह के जन्म दिन 28 सितम्बर को सुबह