बिहार के हाफिटडिफीट वाले नये गारजीवन

बिहार के हाफिटडिफीट वाले नये गारजीवन
April 27 16:03 2026

राकेश कायस्थ
प्राचीन आर्यावर्त की राजनीति में शकुनि का अनुपम स्थान था। महाभारत में उलूक नामक शकुनि पुत्र का भी उल्लेख मिलता है, जो कौरवों के दूत बनकर पांडव शिविर में उन्हें युद्ध से ठीक पहले उन्हें हड़काने गये थे। लेकिन कृष्ण ने शिशुपाल एक्ट के तहत उनपर कोई कार्रवाई नहीं की और सकुशल वापस जाने दिया। महाभारत के युद्ध में शकुनि वीरगति को प्राप्त हुए थे और शकुनि नंदन ‘उलूक’ कथा से उसी तरह गायब हो गये जैसे शोले खत्म हो जाने पर किसी ने ध्यान नहीं दिया कि गब्बर के जाने के बाद अनाथ हुए टोली वालों का क्या हुआ होगा। आधुनिक पाटलिपुत्र में भी एक शकुनि हुए—शकुनि चौधरी। बिहार की सवर्ण वर्चस्वादी राजनीति को ब्राहण-भूमिहारों आदि ने 1990 में यह कहते हुए लठिया कर भगा दिया था कि सब त ठिक्के है, बाकी मजा जरा कम आ रहा है, काहे कि मियवां पिट नहीं रहा है। सीएम डीएम तो हमलोग आगे भी बनबे करेंगे, लाइफ में किक ई अडवनिये देगा। तो बिहार में सत्ता परिवर्तन हो गया लेकिन बदकिस्मती से कुर्सी बीजेपी नहीं बल्कि लालूजी के पास आ गई। आधुनिक शकुनि इसी लालू दरबार की शोभा बढ़ाया करते थे। आधुनिक शकुनि नंदन का नाम उलूक नहीं अपितु राकेश कुमार था। एक दिन मुंगेर में राजनीति महाभारत मचा। दूत बने शकुनि पुत्र भी वहां दल-बल के साथ पहुंचे लेकिन इतने में गोली,कट्टा चक्कू और बम सबके के सब उसी तरह चलने लगे जैसे मिथिला के भोज में तरह तरह के पकवान बारी-बारी से चलते हैं और मना करने वाले हर आदमी को दोगुना परोसा जाता है।

खा-पीकर कुल सात आदमी खर्च हुए। राजनीति के भोज भात में त ई सब होइबे करता है लेकिन कुछ दुष्टों ने इल्जाम कई लोगों के साथ फूल सरीखे मासूम शकुनि नंदन राकेश कुमार पर मढ़ दिया। एफआईआर कटा और जेल के मेस में तुरंत नाम दर्ज हो गया। बाप बेचारे मूर्छित हो रहे थे। लेकिन जिसका नाम ही शकुनि हो क्या उसकी मदद आंखों गांधरी की तरह आंखों पर पट्टी बांधने वाली न्याय की देवी नहीं करेंगी, उ त बहिने ना हुईं जी। तो शकुनि बाबू ने कानून के रास्ते हाफिटडिफीट बनवाकर यह साबित कर दिया कि उनका बालक तो अभी मात्र 14 साल का है। वह हत्या आदि के जघन्य कामों में कैसे लिप्त हो सकता है। मान लीजिये अगर किसी ने फुसलाकर ये सब करवा ही दिया तो फिर कानून के तहत बाल सुधार गृह भेजिये। और इस तरह14 साल के हाफिटडिफीट धारी राकेश कुमार जेल से बाल सुधार गृह पहुंच गये। बाद में हरिकृपा से दूध का दूध पानी का पानी हो गया, न्यायालय ने राकेश कुमार को बाइज्जत बरी कर दिया और सत्यनारायण भगवान ने सबकुछ ब्याज समेत वापस कर दिया। राकेश कुमार राबड़ी देवी सरकार में सीधे कैबिनेट मंत्री बन गये। उस समय बिहार के गवर्नर जिन्हें आरजेडी वाले गोबर नर कहते थे, बीजेपी के एक बड़े नेता हुआ करते थे। उन्होंने कहा—ऐ जी तुम जो हाफिटडिफीट दिये हो, उसके हिसाब से तो अभी लइका हो, मने एकदम्मे नाबालिग हो, उतरो कुर्सी से।

राबड़ी देवी मना करती रहीं लेकिन गर्वनर साहब ने मनमाने तरीके नाप-तौल विभाग के कैबिनेट मंत्री श्रीमान राकेश कुमार को बर्खास्त कर दिया लेकिन भगवान सब देखता है। नर होत नाही हाफिटडिफीट होत बलवान। तो नये हाफिटडिफीट के आधार पर शकुनि पुत्र राकेश कुमार से सम्राट चौधरी बन गये, आरजेडी और जेडीयू से होते हुए पुण्य सलिला उस नदी के तीर पर पहुंच गये जिसे कलजुग की भासा में बीजेपी कहते हैं। कलुजग में पाप और बढ़ा और मोदीजी का अवतार हुआ और जिस बीजेपी ने शकुनि पुत्र को अपमानित करके कुर्सी से उतारा था, उसे बिहार का चक्रवर्ती सम्राट बना दिया। अब जरा तनिक सोचिये कि अगर भारत में मोदी युग नहीं आया होता क्या राकेश कुमार उर्फ सम्राट चौधरी के साथ न्याय हो पाता? हास्य-व्यंग्य के रचनाकार संपत सरल ने लिखा है’  यह जानना सुखद है कि हमारे प्रधानमंत्री सिर्फ एमए ही नहीं बल्कि बीए भी हैं। उनका बीए होना आश्वस्त करता है कि उन्होंने मैट्रिक भी जरूर किया होगा।’ सम्राट चौधरी पर इल्जाम लगता है कि दसवीं फेल हैं लेकिन कानून की देवी जिसकी सगी बुआ हो उसे ऐसे सवालों से क्या घबराना! कहते हैं कि उन्होंने हाफिटडिफीट देकर बताया है कि वो एक जाने-माने विश्वविद्यालय से पीएचडी हैं। इस नाचीज ने एक वीडियो शेयर किया है जिसमें एक टीवी पत्रकार सम्राट चौधरी से पूछ रही है कि आपने दसवीं किस साल पास की थी। जवाब में सम्राट चौधरी कह रहे हैं कि जब हाफिटडिफीट देके सब बताइये दिये हैं तो इहां पब्लिक में दोबारा काहे ला पूछ पूछ रही हैं, हाफिटडिफीट पढिय़े, हम अपने मुँह से नही बताएंगे।

2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी को यह कहते हुए घेरा कि ऐ जी महराज चुनाव वाले हाफिटडिफीट के हिसाब से अभी आपकी उमर 52 साल है, तो मुंगेर मर्डर कांड के बाद 14 साल कैसे हो गये थे? उस समय तो आप 26 साल के थे। आप पर फिर से मुकदमा चलना चाहिए। प्रशांत किशोर जी बड़े-बड़े कालेज में गये लेकिन उनको नालेज नहीं है कि सम्राट चौधरी शकुनि पुत्र हैं, आंखों में पट्टी बांधने वाली कानून की देवी के सगे भतीजे। इस कथा का सुखद समापन यह है कि अब डबल नहीं ट्रिपल इंजन है। दुनिया में ट्रंप है, भारत में मोदीजी हैं और बिहार में हाफिटडिफीट धारी सम्राट चौधरी हैं। दुनिया आगे बढ़ेगी और अभी झूठ लग रहा लेकिन भारत 2047 तक सचमुच विकसित हो जाएगा। तब तक प्रदेश को स्वर्ग और प्रदेशवासियों को सशरीर स्वर्गवासी बनाने के लिए योगीजी, हिमंता जी और सम्राट जी में जबरदस्त कंपीटिशन चलता रहेगा। पुनश्च: हाफिटडिफीट बिहारी हिंदी का वैसा ही शब्द है, जैसा गार्जियन नहीं हमारे यहां गारजीवन है। इसलिए यहाँ आकर कोई ज्ञान ना दे कि अंग्रेजी का मूल शब्द तो एफिडेविट है। बिहार के नये गारजीवन के सामने हमारी संस्कृति का मजाक उड़ाइयेगा तो समझ जाइये! भाग के कहीं नहीं जा पाइयेगा काहे कि जे है सेकी बगलवा में जोगी बाबा की एनकाउंटर मंडली ना बइठल है जी। संक्षेप में इस कथा से शिक्षा यह मिलती है कि भगवान सब देखता है और अच्छे आदमी को सही जगह जरूर पहुंचाता है।
मन में एक ठो अउर बात है, हम सोच रहे हैं कि सम्राट नाम मेरे नाम राशि वालों को बहुत फलता है। हम भी एक ठो हाफिटडिफीट देके नमवा बदलवा ले का जी?

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