पचास साल वाले भ्रष्ट कर्मचारियों-अधिकारियों में किनकों सेवानिवृत्त करेगी हरियाणा सरकार?

पचास साल वाले भ्रष्ट कर्मचारियों-अधिकारियों  में किनकों सेवानिवृत्त करेगी हरियाणा सरकार?
March 02 23:33 2025

भ्रष्टाचारी राजेश खुल्लर को मुख्य प्रधान सचिव बनाने वाली सैनी सरकार का ईमानदार दिखने का पाखंड

मज़दूर मोर्चा ब्यूरो
बीते दस साल में भ्रष्टाचार के कीर्तिमान बनाने वाली भाजपा सरकार अब पचास साल से अधिक उम्र वाले भ्रष्टा अधिकारियों का मूल्यांकन करने का पांखड कर रही है। बताया जा रहा है कि मूल्यांकन में जो अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाएंगे उन्हें जबरन सेवानिवृत्त किया जाएगा। सीएम नायब सैनी ने एक ओर तो भ्रष्टतम कहे जाने वाले आईएएस राजेश खुल्लर को सेवानिवृत्ति के बाद भी अपना मुख्य प्रधान सचिव बनाया है दूसरी ओर भ्रष्टाचार खत्म करने की जुमलेबाजी कर रहे हैं। जुमलेबाजी इसलिए कि पचास साल की उम्र पूरी करने वालेे सरकारी कर्मचारी-अधिकारी की सेवाओं का मूल्याकंन किए जाने का नियम पहले से ही चला आ रहा है। इस नियम के तहत पिछली सरकारों ने भी भ्रष्टाचारी अधिकारियों को सेवा से बाहर किया है, सीएम सैनी की सरकार कोई नई बात नहीं कह रही। बड़ी बात यह है कि सरकार जो दावे कर रही है उस पर अमल भी करेगी? और भ्रष्ट अधिकारियों को बाहर करेगी या फिर यह भी ईमानदार दिखने के लिए भाजपाइयों का जुमला ही साबित होने वाला है।

मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार पचास साल या उससे अधिक उम्र वाले अधिकारियों को नौकरी से हटाए जाने के लिए सरकार ने बाकायदा रणनीति तय की है। इसके तहत पचास से अधिक उम्र वाले अधिकारियों की सर्विस, उनका ट्रैक रिकॉर्ड, व इमेज रिव्यू किया जाएगा। प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के अनुसार अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) अहम भूमिका निभाएगी। अगर कोई अधिकारी भ्रष्टाचार के केस में पकड़ा गया है या इस तरह के मामले में संलिप्त पाया गया है तो उसे पचास साल की उम्र के बाद नौकरी पर नहीं रखा जाएगा, यानी उसका दोषी सिद्ध होना जरूरी नहीं है।

जानकार आशंका जताते हैं कि इस प्रवाधान का इस्तेमाल सरकार ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कर सकती है जो निष्पक्ष ढंग से काम करते हैं और सरकार या सत्ता की चापलूसी नहीं करते। उनका मानना है कि नफरत-झूठ की संघी पाठशाला में तैयार अंधभक्तों से ऐसे अधिकारियों के खिलाफ झूठी शिकायत करा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के फर्जी केस बनवाए जाएंगे, और इन्ही आरोपों के आधार पर, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के शब्दों में, उन अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया जाएगा। इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता कि मंत्री नेताओं की चरण वंदना करने वाले भ्रष्टाचारी अधिकारियों पर सरकारी मेहरबानी बनी रहे और उन्हें न हटाया जाए। राजनीतिक जानकार कहते हैं कि संघी मानसिकता से शासित होने वाली भाजपा सरकार की मंशा भ्रष्टाचारी अधिकारियों को हटाने की नहीं बल्कि इसके नाम पर पचास साल या उससे ज्यादा उम्र वाले अधिकारियों के पद खाली कराने की है। सरकार नई भरती की आड़ में संघियों को या मोटी रकमें लेकर चहेतों को नौकरी देकर बेरोजगार युवाओं और समाज को ठग सकती है।यह एक खुला सत्य है कि जीरो टॉलरेंस का ढिंढोरा पीटने वाले मोदी-खट्टर-सैनी की सरकारों में बीते दस साल में भ्रष्टाचार के नई कीर्तिमान बने। मंत्री-विधायक और सत्तापक्ष के नेताओं से संरक्षण प्राप्त होने के कारण अधिकारियों ने बेखौफ होकर खुल कर लूट कमाई की और सत्तापक्ष के नेताओं को हिस्सा भी दिया।
इसका उदाहरण पिछली सरकार में मंत्री रहे बल्लभगढ़ के विधायक मूलचंद के रूप में सामने भी आ चुका है। बताया जाता है कि दो सौ करोड़ घोटाले की विजिलेंस जांच में सामने आया कि प्रमुख आरोपियों में से एक ठेकेदार सतबीरा ने मंत्री मूलचंद को करीब पचास लाख रुपये कीमत वाली फॉच्र्यूनर गिफ्ट की थी, जो नाम तो सतबीरा के थी लेकिन इस्तेमाल मंत्री जी करते थे।

यह तथ्य भी किसी से छिपा नहीं है कि बीते करीब ग्यारह साल की भाजपा सरकार में प्रदेश में शायद ही कोई ऐसा जिला हो जहां करोड़ों के प्रशासनिक घोटाले सामने न आए हों, लेकिन आज तक कोई अधिकारी दोषी साबित नहीं हुआ। होगा भी नहीं, क्योंकि इन घोटालों में भाजपाई नेता-मंत्री-विधायक शामिल रहे हैं। खुले बाजार में तीन से चार लाख रुपये में मिलने वाले स्टेनलेस स्टील टॉयलेट केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर और पूर्व विधायक सीमा त्रिखा की देखरेख में स्मार्ट सिटी ने बीस लाख रुपये की दर से खरीदे, एक साल में ही इनमें जंग लगा तो सामने आया कि ये स्टेलनेस स्टील के नहीं बल्कि घटिया टिन के बने थे। सीमा त्रिखा ने तो अपने भाई को ही स्मार्ट सिटी के पोर्टेबल टायलेट सप्लाई का ठेका दिलवाया था जिनकी कीमत बाजार से चार गुना ज्यादा बताई गई थी। ये उदाहरण सिर्फ बानगी हैं पूरे प्रदेश में ही भाजपा नेताओं के लिए उनके पालतू अधिकारियों द्वारा विकास के नाम पर खुली लूट मचाने के सैकड़ों मामले हैं। ऐसे में इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि सरकार अपने चहेते भ्रष्टाचारी अधिकारियों को सेवानिवृत्त नहीं करे और दूसरों को हटा दे।

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Mazdoor Morcha
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