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लेख

हिंदुत्व की राजनीति ने हिंदू धार्मिक उत्सवों पर असर डाला है

शुभेंद्र त्यागी कातिक महीने की परबा है, शरद ऋतु. धूप अब मद्धिम सी पडऩे लगी है. ‘मेला लगे दिवारी की दौज, लांगुरिया’  गाते हुए विंध्यांचल के ‘बिकट पहाड़ों पर बैठी’ 

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बंटेंगे तो कटेंगे के बाद, एक हैं तो सेफ हैं का जुमला

सुसंस्कृति परिहार जुमलेबाजी के दौर में नारों के निर्माण में जिस तरह की होशियारी के साथ भाजपा करवट लेती है, यह संघ के आचरण की घिसी-पिटी लकीर है। देश भर

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धार्मिक कट्टरताओं का कहर सबसे ज़्यादा स्त्रियों पर टूटता है

धार्मिक कट्टरताओं का कहर सबसे ज़्यादा स्त्रियों पर टूटता है. लगभग सभी धर्म घोर पितृसत्तात्मक हैं, पुरुषों के लिये, पुरुषों द्वारा, पुरुषों की दृष्टि से लिखे गए हैं, इसमें संशय

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हेल्गा…

मनीष हिटलर को बच्चो से बड़ा प्यार था. बशर्ते बच्चा आर्य हो, गोरी चमड़ी, नीली आंखे और एथनिक जर्मन हो. हेल्गा में सब था. ** तो हिटलर को हेल्गा से

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‘बंटेंगे तो कटेंगे’ एक सांप्रदायिक नारा है, इसके सामाजिक और राजनीतिक मायने गहरे हैं

चंदन यादव ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ अब भाजपा का राष्ट्रीय नारा बन चुका है. कुछ समय पहले यह सोशल मीडिया पर असामाजिक तत्वों द्वारा प्रयोग में लाया गया और फिर भाजपा

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भक्ति-काल और जाति-प्रश्न कँवल भारती

(कालीकट यूनिवर्सिटी में व्याख्यान, 23 अक्टूबर, 2024) आदरणीय अध्यक्ष महोदय प्रोफ़ेसर माधव हाड़ा, प्रोफ़ेसर अवधेश प्रधान, विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुब्रह्मणयन, आयोजक प्रोफ़ेसर प्रभाकरन हेब्बार इल्लत और उपस्थित छात्र-छात्राओं !! सेमिनार के

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वर्दी वाले ‘गुंडों को ‘हत्यारा बनाती सरकार!

पंकज श्रीवास्तव हिंदी-भाषी समाज में पढऩे की आदत में गिरावट के शुरुआती शोर के बीच एक हिंदी उपन्यास ने बिक्री के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिये थे।1993 में छपे 347 पेज

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स्तनपान का ग्लैमर और हम

सोनाली मिश्र कई दिनों से एक बार फिर से स्तनपान चर्चा में है. एक मैगजीन की फोटो पर एक मॉडल का चित्र है और उस पर लिखा है कि मुझे

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गांधी जी हटो, यहां कुछ और करेंगे

विनोद पांडे कई सालों से नैनीताल के सौंदर्यीकरण के नाम विचित्र हरकतें की जा रही हैं। जिनमें भारी-भरकम रैंलिंग, विचित्र किस्म के भित्ति चित्र सरीखी कलाकृतियां, शिलालेखों की तरह बहुत

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धीरेंद्र झा ने गोलवलकर की जीवनी के ज़रिये भारतीय फासिज़्म की जीवनी लिखी है

अपूर्वानंद गोलवलकर: द मिथ बिहाइंड द मैन, द मैन बिहाइंड द मशीन धीरेंद्र के. झा की नई किताब है। हिंदुत्ववादी विचारधारा और संगठन का धीरेंद्र झा बरसों से अध्ययन कर

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