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लेख

सुअर / हरिशंकर परसाई

चौबे जी को मैं पांडे जी के घर ले गया।चौबे जी के लड़के की शादी की बात पांडे जी की लड़की से चल रही थी। हम पांडे जी के घर

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क्या भारत, अमेरिका के इशारे पर चलता है? गतांक से आगे

क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा भारत-अमेरिका संबंधों का इतिहास नेहरू की पहली अमेरिका यात्रा अक्टूबर 1949 में हुई. हेरी ट्रूमेन, नेहरू को अपने साथ बग्गी में बिठाकर एअरपोर्ट से वाइट हाउस तक

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मुठभेड़ की राजनीति और लोकतंत्र में मनमानापन

प्रफुल्ल कोलख्यान व्यापार और राजनीति दोनों ही ‘लुका-छिपी का खेल है, लेकिन जब राजनीति व्यापार हो जाये और व्यापार राजनीति तब लुका-छिपी के हाल का अनुमान लगाना बड़ी कठिन है।

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गहरे संकट काल में कॉमरेड येचुरी का जाना

सुसंस्कृति परिहार अपरान्ह जैसे ही कामरेड सीताराम येचुरी के अवसान की ख़बर आई तमाम वामपंथी संगठनों में ख़ामोशी छा गई। वे एक प्रसिद्ध स्तंभकार, अर्थशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप

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स्लामोफोबिया से मुकाबला बहुत पहले शुरू हो जाना था

राम पुनियानी जुलाई 2024 में इंग्लैड के कई शहरों में दंगे और उपद्रव हुए. इनकी मुख्य वजह थीं झूठी खबरें और लोगों में अप्रवासी विरोधी भावनाएं. अधिकांश दंगा पीडि़त मुसलमान

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एक बार फिर हिंदुत्व की ड्योढ़ी पर भाजपा

सुसंस्कृति परिहार मिले सुर मेरा तुम्हारा की तर्ज़ पर जातिगत जनगणना से उपजे हालात पर काबू पाने के लिए संघ और भाजपा एकजुट हुए लगते हैं। दोनों हिंदुत्व की ड्योढ़ी

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हेमा आयोग रिपोर्ट : सामाजिक-सांस्कृतिक सड़ांध का चीखता दस्तावेज़

महिलाओं की सामाजिक दशा से हम सामाजिक विकास को नाप सकते हैं – कार्ल माक्र्स मलयालम फिल्म उद्योग में महिला कलाकारों/मज़दूरों के शारीरिक शोषण, बलात्कार की ख़बरें हर रोज़ आने

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महामहिम जी, कम से कम आप तो महिलाओं को बराबरी की नजर से देखिए!

महेंद्र मिश्र अब तो महामहिम ने भी कोलकाता रेप और मर्डर पर अपना मुंह खोल दिया है। बीजेपी राज में सरकारी संस्थाओं की ऐसी-तैसी किसी से छुपी नहीं है। यही

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बलात्कार का मनोविज्ञान कनेक्शन या सेक्स की अनुपलब्धता

संजीव चंदन पिछले दिनों सोनागाछी,कोलकाता की महिलाओं (वेश्यावृत्ति में शामिल) ने कोलकाता में बलात्कार की घटना के बाद कहा कि बलात्कारियों को यौन जरूरतों के लिए उनके पास आ जाना

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दो छोटे-छोटे वाक्य हैं जिन्हें हमें जिंदगी में बार-बार कहना चाहिये, लेकिन हम उन्हें कह नहीं पाते

अनुरोध शर्मा मैं नहीं जानता और, मैं ग़लत था। इन दोनों के मूल में हमारा अहंकार छिपा है कि हम सब कुछ जानते हैं, और जब हम सब कुछ जानते

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