सुअर / हरिशंकर परसाई

सुअर / हरिशंकर परसाई
October 14 05:23 2024

चौबे जी को मैं पांडे जी के घर ले गया।चौबे जी के लड़के की शादी की बात पांडे जी की लड़की से चल रही थी।
हम पांडे जी के घर के बरामदे में बैठे थे। लड़की चाय-नाश्ता दे गई थी। चौबे जी ने उसे देख लिया था। पांडे जी का पैतृक मकान था। वह शहर के पुराने मुहल्ले में था। गंदा मुहल्ला था। बरामदे से कचरे के ढेर दिख रहे थे। आसपास सुअरों की कतारें घूम रही थीं।

चौबे जी यह देख रहे थे और उन्हें मतली-सी आ रही थी। वे बोले- हॉरीबल! इस कदर सुअर घूमते हैं, घर के आसपास!
बाकी बातें मुझे करनी थीं। हम लौटे। चौबे जी से मैं दो-तीन दिन बाद मिला। उन्होंने कहा- भई, लड़की तो बहुत अच्छी है। मगर पांडे का घर बहुत गंदी जगह पर है। सुअर आसपास घूमते हैं। हॉरीबल!

मैंने कहा- मगर आपको उस घर से क्या करना है? आपको तो लड़की ब्याह कर लानी है।
चौबे जी ने कहा- मगर क्या लड़का ससुराल नहीं जाएगा? या मैं समधी से कोई संबंध नहीं रखूंगा? मैं सबसे ज्यादा इस सुअर से नफरत करता हूं। आई हेट दीज़ पिग्स। मुझे अभी भी उस घर की कल्पना से मतली आती है।

मैंने कहा- सोच लीजिए। लड़की बहुत अच्छी है। परिवार अच्छा है।
चौबे जी ने कहा- सो तो मैं मानता हूं। मगर मैं लड़के की बारात लेकर उनके दरवाजे पर पहुंचा और मुझे उलटी हो गई तो? पिग्स। मैं बरदाश्त नहीं कर सकता।
मैंने कहा- वैसे पांडे काफी देंगे।

चौबे बोले- क्या देंगे? यही दस-पंद्रह हजार।
मैंने कहा- नहीं, पचास हजार देंगे। जेवर अलग। एक ही तो उनकी संतान है।
चौबे जी सोचने लगे। सुुअर से लौटकर रुपयों तक आने में उन्हें कुछ वक्त लगा। थोड़ी और बातचीत के बाद उन्होंने कहा- जब तुम्हारा इतना जोर है, तो रिश्ता तय कर दो।
चौबे जी ठाठ से बेटे की बारात लेकर पांडे जी के द्वार पर पहुंचे।
द्वार पर पंद्रह हजार रुपए दिए गए।

शामियाने के नीचे चौबे जी बैठे थे। उनकी नजर वहीं लगी थी, जहां विवाह की रस्में हो रही थीं। वे इंतजार कर रहे थे कि थाली में पैंतीस हजार और आते होंगे।
इसी समय एक सुअर का बच्चा वहां घुस आया। दो-तीन लोग उसे बाहर खदेडऩे लगे। एक-दो ने उसे छड़ी मारी। सुअर का बच्चा घबराकर भटक गया। उसे रास्ता नहीं मिल रहा था। वह चौबे जी की तरफ बढ़ा। लोग उसके पीछे पड़े थे। चौबे जी ने कहा- अरे, अरे, उसे तंग मत करो। सुअर का बच्चा बड़ा खूबसूरत होता है। वेरी स्वीट!
और चौबे जी प्यार से सुअर के बच्चे पर हाथ फेरने लगे। इसी समय थाली में पैंतीस हजार रुपए आ गए।
सुअर का बच्चा ऐसे इतमीनान से खड़ा था जैसे अपने पिता के पास हो।

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Mazdoor Morcha
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