महेंद्र मिश्र अब मनुस्मृति की बात चली है तो कुछ चीजें मनुस्मृति में जो लिखी हैं उन पर भी नजर दौड़ा लिया जाए। और यह हम किसी कपोलकल्पित किताब या
कृष्ण मुरारी अपने आलीशान टेंट में आराम से सात्विक नाश्ता करने के बाद पंकज बख्शी और उनका परिवार प्रयागराज में महाकुंभ में ‘वीआईपी संगम’ के लिए एक निजी नाव पर
विष्णु नागर एक थे चड्डीश्वर। चड्डी जहां पहनना चाहिए, वहां तो पहनते ही थे मगर जहां नहीं पहनना चाहिए, वहां भी पहनते थे। उदाहरण के लिए उसे कमीज की तरह
इलिका प्रिय वर्ष 2025 की शुरुआत ही कुछ बुरी खबरों से हुई, 3 तारीख को खबर मिली कि पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या कर दी गई है, एक दिन बाद
सरोज मिश्र कहते हैं अयोध्या में राम जन्मे, वहीं खेले-कूदे, बड़े हुए, बनवास भेजे गये, लौटकर आये तो वहाँ राज भी किया। उनकी जि़ंदगी के हर पल को याद करने
राम पुनियानी तवलीन सिंह एक जानी-मानी स्तंभ लेखक हैं.) गत 8 दिसंबर 2024 को द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित उनके कॉलम में उन्होंने अफगानिस्तान में महिलाओं के चिकित्सा विज्ञान पढऩे
मज़दूर मोर्चा ब्यूरो बांग्लादेश में सम्मिलित सनातनी जागरण जोत संगठन के प्रवक्ता चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ़्तारी के विरोध में भारत में संघ-भाजपा समर्थित कट्टरवादी हिंदू संगठनों द्वारा आए दिन
राम पुनियानी सन 1980 के दशक में देश में शांति-व्यवस्था और प्रगति पर गम्भीर हमले हुए. साम्प्रदायिक ताकतों के हाथ एक नया औज़ार लग गया. वे देश के पूजास्थलों के
पंकज श्रीवास्तव पिछले दिनों ढाका युनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर शाहिदुज्ज़माँ का एक वी़डियो वायरल हुआ जिसमें वे पाकिस्तान से परमाणु कऱार करने और परमाणु हथियारों को भारत की सीमा पर तैनात
ऋ षभ श्रीवास्तव राग दरबारी पढ़ते हुए छुआछूत के प्रति जुगुप्सा नहीं होती, हंसी आती है। पर मुर्दहिया का उद्धरण पढ़ कर क्रोध और ग्लानि होती है. हिंदी साहित्य में