मनीष हिटलर को बच्चो से बड़ा प्यार था. बशर्ते बच्चा आर्य हो, गोरी चमड़ी, नीली आंखे और एथनिक जर्मन हो. हेल्गा में सब था. ** तो हिटलर को हेल्गा से बड़ी मोहब्बत थी. हिटलर अंकल के साथ घूमती, उनकी गोद मे बैठती. सारी दुनिया मे वही अकेली वही इतनी हिम्मत रखती थी कि किसी मीटिंग में बैठे हिटलर के कमरे का दरवाजा खोलकर भागती हुई जाये, और उससे जो मर्जी आये पूछ लें. डिस्टर्ब और डिस्ट्रैक्ट करे. ** हेल्गा, मैग्दा की बेटी थी. मैग्दा एक आदर्श जर्मन नारी थी. उसने 6 बच्चे पैदा किये थे. वह लुफ्तवाफे याने जर्मन एयरफोर्स में अफसर रह चुकी थी. वह भी शुद्ध जर्मन नस्ल की, अच्छे खानदान की बेटी थी. मैग्दा गोयबल्स की पत्नी भी थी. गोयबल्स हिटलर का वफादार था, मगर पत्नी का नही. प्रोपगंडा मिनिस्टर था, तो पूरा सिने जगत उसकी मु_ी में था. तमाम हीरोइनें भी. तो उन किस्सों की खबर हिटलर को थी, मैग्दा को भी. हिटलर ने गोयबल्स को डांटा भी था कि वह अपना सुंदर चमन, हीरोइनो के चक्कर मे बर्बाद न करे. फिर गोयबल्स सुधर गया. न भी सुधरा हो, तो मेरी बला से. ** बला ये कि मियां बीवी नाजीज्म को पूरी तरह डिवोटेड थे. उनका जर्मन जाति की उच्चता, अपने देश की महानता, यहूदियो की निम्नता, और जर्मनी के विश्वगुरु बनने के लक्ष्य पर अटूट भरोसा था. और यह सब सिर्फ हिटलर ही कर सकता था. वो महान था, देवता था, मसीहा था. तो मैग्दा और जोसेफ गोयबल्स के सारे बच्चो के नाम एच से शुरू होते. हेरल्ड, हेल्गा, हिलड़ेगार्ड, हेल्मट, होल्डिन, हैडविग, हैडरन…जो कि इस परिवार के लिए हिटलर को ट्रिब्यूट थी. ** इसलिए जब बडे बडे जनरल बर्लिन छोड़कर भाग रहे थे, मैग्दा और जोसेफ पूरा परिवार लेकर हिटलर के बंकर में आ गये. हिटलर के अलावे वही परिवार वहां रहने का मौका पा सका था. सुंदर हेल्गा, बंकर के भीतर, अपने भाई बहनों के साथ खेलती रहती. बाहर बम गिर रहे थे न.. तीन दिन ही बीते थे, कि मम्मी पापा आये. सभी बच्चो को खूब प्यार किया. मीठी बातें की, सब खूब हंसे, बोले, गाये. फिर मां ने अपने हाथों से बच्चो को सेब काटकर खिलाया. सेब में जहर था…. ** हेल्गा और उसके नन्हें भाई बहन सुबह तक लाश में बदल चुके थे. हिटलर ने एक दिन पहले ही आत्महत्या कर ली थी. मम्मी पापा कमरे में आये. बच्चो की लाशों को प्यार किया. आखों में आँसू नही थे रोने का वक्त जो नही बचा था. लाशो को एक झलक देखकर, वे बंकर के बाहर गए. रूसी झंडे कुछ दूरी पर दिख रहे थे. बम पटाखे छूट रहे थे. गोयबल्स ने पहले मैग्दा को गोली मारी. फिर खुद को. गाड्र्स खड़े देखते रहे. फिर साहब के निर्देश के मुताबिक मियां बीवी को पेट्रोल डालकर जला दिया. ** मैग्दा और गोयबल्स, सच्चे नाजी थे. अपने नेता के प्रति हृदय से समर्पित. आजकल के देहाती नाजी, जो एक चुनावी हार के बाद अपने नेता पर शक करने लगते है, उन्हें इन दोनों से सीखना चाहिए. असली फॉलोवर, सच्चा फैनेटिक, प्राणों के अंत तक नेता के साथ रहता है. नेता के साथ जान देता है. खुद मरने के पहले अपने हाथों से अपने बच्चो के भी प्राण लेता है. क्योकि नेता है, तो पार्टी है, दुनिया है, देश है, संगठन है, धर्म है, जीवन है. नेता नही, तो दुनिया मे क्या रखा है? ** इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है कि तानाशाह के अच्छे फालोवर फॉलोवर्स को तानाशाह के साथ, सपरिवार आत्महत्या कर लेनी चाहिए. बहरहाल बात हेल्गा की. कुछ लोग कहते है, जहर सेब में नही था. उसे उसकी मां ने सायनाइड का कैप्सूल जबरन चबवाया था. और हेल्गा ने खूब संघर्ष किया. इस संघर्ष के निशान उसके चेहरे पर खरोच, और चोट के रूप में मौजूद थे. ** हिटलर का हाथ पकड़कर टहलती मासूम हेल्गा को यह नही मालूम था कि जो नेता, जो रेजीम, जो मां और बाप.. हैवान हो चुके हैं; जो बरसों तक दूसरों के बच्चो, माताओ, भाइयो, पिताओं को बिना गिल्ट, बिना करुणा, बिना विचार मौत के घाट उतारने की आदत बना चुके है.. वे, वक्त आने पर अपनो को, अपने बच्चो को भी कहाँ छोड़ेंगे.