नारनौल (मज़दूर मोर्चा) बीते दस साल का चुनावी गणित देखने से पता चलता है कि अहीरवाल क्षेत्र भाजपा का एक मज़बूत किला रहा है। 2013 में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनने के बाद मोदी ने इसी क्षेत्र में बड़ी भारी रैली को संबोधित किया था, सेवानिवृत्त फौजियों की पेंशन मसले को लेकर की गई उस रैली में एक लाख से ऊपर लोगों की हाजिरी बताई गई थी।
आज उसकी अहीरवाल में मोदी घुसने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं। हरियाणा में जहां कहीं भी वे अपनी रैलियां कर रहे हैं, आधे से अधिक कुर्सियां खाली ही रह जाती हैं। इस क्षेत्र में भाजपा की सबसे मज़बूत सीट नांगल चौधरी रही है। यहां से सेवानिवृत्त आईएएस अभय सिंह यादव दो बार भारी मतों से चुनाव जीत चुके हैं। राव इंद्रजीत के विरोधी खेमे के होने के चलते खट्टर मंत्रीमंडल में वह कभी शामिल नहीं हो पाए।
बिल्ली भागों छींका तब टूटा जब नायब सिंह सैनी मुख्यमंत्री बने और उन्हें मंत्री पद नसीब हुआ। मंत्री बनने के बावजूद इस बार उनका विधायक बन पाना असंभव नजऱ आ रहा है। उनके मुकाबले खड़ी पूर्व विधायक फूसाराम की पुत्रवधु मंजू चौधरी काफी मजबूत स्थिति में बताई जा रही हैं। अन्य कारणों के अलावा इसका एक बड़ा कारण इस महिला का गूजर जाति से होना है। जहां राव अभय सिंह के मुकाबले में कई अहीर खड़े हैं वहीं तमाम गूजर जाति एकजुट होकर खड़ी है।
महेंद्रगढ़, नारनौल और रेवाड़ी में भी लगभग यही स्थिति बनी हुई है इनमें भी भाजपा उम्मीदवार बहुत ही विकट स्थिति में फंसे हुए हैं। अटेली विधानसभा सीट से राव इंंद्रजीत की बेटी आरती यादव भाजपा के टिकट पर, तो अतरलाल बसपा-इनेलो गठबंधन उन्हें कड़ी चुनौती देते प्रतीत हो रहे हैं। कांग्रेस उम्मीदवार अनीता यादव ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना रखा है।
सूत्रों की मानें तो अतरलाल की स्थिति इतनी मजबूत है कि कांग्रेस और भाजपा दूसरे नंबर पर आने की लड़ाई लड़ रहे हैं। कोसली और महेंद्रगढ़ सीटों पर भी भाजपा की स्थिति काफी विकट बताई जा रही है। महेंद्रगढ़ से कभी भाजपा के कद्दावर नेता रामविलास विधायक बना करते थे, इस बार पार्टी ने जो उनकी दुर्गति की है उसके चलते तो भाजपा की स्थिति और भी चौपट हो चुकी है। दिया था, वह दोबारा कैसा काम करेगी और प्रदीप संधू उसे क्लीनचिट् देने के लिए तो बैठे ही हैं।