चुनाव में भाजपा से 5 करोड़ लेने के इल्जाम करनाल (एम.एस.निर्मल) करनाल से दो बार कांग्रेस की टिकट पर दो सीएम के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ चुके त्रिलोचन सिंह ने भाजपा में शामिल होने के बाद कांग्रेस के बड़े नेताओं पर बेहद सनसनीखेज एवं तीखे आरोप लगाने का क्रम तेज कर दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी में कार्यकर्ताओं को मान सम्मान देने में कंजूसी की जाती है। कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर पूंजीपतियों और चापलूसों को अहमियत मिलती है। इतना ही नहीं, सिफारिश के आधार पर लोगों को पद दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस का संगठन न होने और कांग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा एक दूसरे की हराने के लिए की गई कार्रवाई से तंग आकर उन्हें पार्र्टी छोडऩे पर विवश होना पड़ा। जोर देकर कहा कि कांग्रेस के नेता हवाबाजी में ज्यादा विश्वास करते हैं। आरोप लगाया कि करनाल से कांग्रेस की टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुकी सुमिता सिंह ने उन्हें हराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी।
इतना ही नहीं ऊपर सेटिंग करके मेरा टिकट कटवा दिया गया जबकि पिछले 42 सालों से मैं कांग्रेस पार्टी की सेवा में लग रहा। इस दौरान सरकार की नीतियों के विरोध में जनता की आवाज उठाने के दौरान मेरे ऊपर अनेकों केस दर्ज हुए लेकिन कांग्रेस हाई कमान ने सुमिता सिंह के दबाव में मेरा टिकट काट दिया। सुमिता सिंह को मेरे को मिले वोटों से केवल 2 हजार अधिक वोट मिले तो फिर मैं सुमिता से कमजोर केंडिडेट कैसे हुआ।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के प्रभारी टिकट के दावेदारों से अपने खर्चे करवाते रहे। कांग्रेस पार्टी के प्रभारी ने कई नेताओं को टिकटों के लालच दिलवा कर उनसे मोटी रकम भी खर्चवाई। इस बारे में शिकायतें करने के बावजूद भी ऊपर बैठे कांग्रेस के बड़े नेताओं ने कोई कार्रवाई नहीं की। बड़ा दावा किया कि गत विधानसभा चुनाव में पार्टी के नेताओं की वजह से ही कांग्रेस सत्ता से दूर रह गई। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि मुझ पर कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने गत विधानसभा चुनाव में भाजपा से 5 करोड़ रुपये लेकर जीत के लिए चुनाव न लडऩे के गंभीर इल्जाम लगाए जो सरासर निराधार है। वास्तविकता यह है कि कांग्रेस पार्टी के लोगों ने ही मुझे हरवाने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि करनाल से कांग्रेस पार्टी के लिए धरने-प्रदर्शन करने, पार्टी की नीतियों और जनता की आवाज उठाने का काम मैंने अपने साथियों के साथ पूरी निष्ठा से किया। जबकि सुमिता सिंह ने जनता की आवाज उठाने के बजाय करनाल छोड़कर अपना कारोबार चलाया। वह सरकार द्वारा कार्रवाई करने के डर से करनाल छोड़कर चली जाती और चुनाव आता तो चुनाव लडऩे आ जाती हैं। ऐसे नेता को टिकट देने का क्या लाभ है। उन्होंने कहा कि मैंने सदा के लिए कांग्रेस पार्टी से अलविदा कर दिया है, अब दोबारा कभी लौटकर कांग्रेस पार्टी में नहीं जाऊंगा। मेरी इच्छा है कि अंतिम सांस तक मैं भारतीय जनता पार्टी में रहूं और भाजपा के झंडे में लिपटकर ही इस दुनिया से अलविदा हूं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के संगठन, उनके नेतृत्व और काम करने के तरीके की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने करनाल से नगर निगम चुनाव में भाजपा की तगड़ी जीत का दावा भी किया है।