मज़दूर मोर्चा ब्यूरो जेई हैप्पी और क्लर्क हरीश के छुट्टी काटने के बावजूद उनको दो दो माह का वेतन जारी करने वाले ईओ सुशील कुमार भुक्कल का तबादला रेवाड़ी से शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय पंचकूला कर दिया गया है। चर्चा है कि ईओ साहब ने निलंबन की गाज से बचने के लिए विधायक चाची गीता भुक्कल के जरिए दीपेंद्र हुड्डा से सिफारिश करवाई। वह चाहते थे कि बिना जांच के ही उन्हें क्लीनचिट् मिल जाए लेकिन मुख्यालय में बैठे आला अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच के लिए उनका तबादला मुख्यालय पंचकूला कर दिया। चर्चा तो यह भी है कि राजनीतिक रसूख के जरिए ईओ साहब ने पंचकूला मुख्यालय में तबादला इसलिए करवाया है कि वह वहां वही साकेत कुमार बैठते हैं जिनको डीएमसी ब्रह्म प्रकाश ने ईओ के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए चिट्ठी लिखी है।
कांग्रेस की विधायक गीता भुक्कल का भतीजा होने के कारण रेवाड़ी नगर परिषद के ईओ सुशील भुक्कल अधिकारियों को कुछ नहीं समझते हैं, यदि किसी अधिकारी ने दबाव देने की कोशिश की तो उसके खिलाफ तुरंत दलित उत्पीडऩ का कार्ड चलने में भी माहिर हैं। ऐसे में खुद को नियमों से ऊपर मान रहे ईओ साहब ने अति आत्मविश्वास में चार महीने की छुट्टी पर गए जेई हैप्पी और दो महीने से बिना सूचना गायब क्लर्क हरीश कुमार गौतम का वेतन जारी कर दिया। मज़दूर मोर्चा ने इसका खुलासा किया तो जेई हैप्पी और अकाउंटेंट जीतेंद्र यादव निलंबित कर दिए गए। गर्दन फंसने पर ईओ महोदय ने बीते दिनों पत्रकार वार्ता कर अपनी सफाई दी, सफाई क्या, उन्होंने पत्रकार वार्ता में अपने गुनाह कुबूल लिए।
बताते हैं कैसे, उन्होंने कहा कि हैप्पी जेई ने 18 अगस्त 2025 से मध्य दिसंबर 2025 तक अवैतनिक छुट्टी का आवेदन किया था। क्योंकि वह सीधे छुट्टी नहीं दे सकते तो आवेदन एक्सईएन से मार्क होकर आया था। उन्होंने नियमानुसार छुट्टी देने का अनुमोदन कर दिया। अपने बचाव में कहते हैं कि इसकी फाइल उन्होंने अनुमोदन के लिए डीएमसी को भेजी, जिस पर आज तक कोई जवाब नहीं आया। कहते हैं कि इस दौरान हैप्पी ने अक्तूबर में ज्वाइनिंग कर ली। क्योंकि आला अधिकारियों से उसकी छुट्टी सेंक्शन नहीं थी इसिलए अकाउंटेंट ने वेतन जारी कर दिया। ईओ साहब कोई मोटी बुद्धि वाला भी आपकी चालाकी पकड़ लेगा। पहली बात हैप्पी को छुट्टी तो एक्सईएन के अनुमोदन पर दी गई तो ज्वाइनिंग में उनकी परमिशन क्यों नहीं ली गई। दूसरी बात यदि आला अधिकारी ने अनुमोदन नहीं किया था तो हैप्पी को छुट्टी कैसे मिल गई, उसके लिए कौन जिम्मेदार है। तीसरी बात यदि हैप्पी ने अक्तूबर में ज्वाइन भी कर लिया तो क्या अकाउंटेंट साहब ने रजिस्टर या बायोमीट्रिक हाजिरी जांचे बिना ही उसका वेतन बना दिया। बायोमीट्रिक में तो वह पूरे चार महीने तक अनुपस्थित था। सवाल यह भी है कि आपने हैप्पी से महंगा स्मार्टफोन गिफ्ट क्यों लिया। पाठकों को बताते चलें कि नगर परिषद के रिकॉर्ड के अनुसार डीएमसी ब्रह्मप्रकाश ने वेतन जारी करने के अपने अधिकार को ईओ सुशील भुक्कल को डेलिगेट कर रख्रा था, ऐसे में हैप्पी को वेतन जारी करने की पूरी जिम्मेदारी उनकी ही है।
ईओ साहब ने पत्रकार वार्ता में बताया कि हैप्पी ने दो माह की वेतन राशि बारह प्रतिशत ब्याज सहित निगम के खजाने में जमा करा दी है, यह साबित करता है कि हेराफेरी कर हैप्पी को वेतन जारी किया गया था, लौटाने से अपराध समाप्त नहीं हो जाता। ईओ साहब चालाकी से यह छिपा गए कि हैप्पी ने यह पैसा कब जमा करवाया। नगर परिषद सूत्रों के अनुसार मज़दूर मोर्चा में खबर प्रकाशित होने पर गर्दन फंसते देख ही ईओ साहब ने डैमेज कंट्रोल करने के लिए हैप्पी से धन जमा करवाया। यदि दोनों की नीयत साफ होती तो वेतन जारी होते ही हैप्पी खुद ही इस गलती की घोषणा कर तुरंत पैसा वापस करते, दिसंबर के बाद जनवरी गुजर गया, ईओ साहब ने एक लाख का मोबाइल भी ले लिया, लेकिन तब तक उन्हें अवैध रूप से जारी किए गए वेतन की सुध नहीं आई।
ईओ साहब ने हैप्पी के बारे में ढेर सारी सफाइयां दीं लेकिन क्लर्क हरीश कुमार गौतम भी तो दो महीने गायब रहा था उसका वेतन कैसे जारी कर दिया गया। पहले तो उसका ही वेतन जारी किया गया था, लगता है कि ईओ महोदय ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत हरीश को गायब रहने के बावजूद दो महीने का वेतन जारी किया, कोई सुगबुगाहट नहीं होने पर हैप्पी से स्मार्टफोन की सौदेबाजी कर उसे भी तनख्वाह दे डाली। ईओ साहब की ईमानदारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन पर एक दो नहीं कई दर्जन फर्जी प्रॉपर्टी बनाने के आरोप हैं। प्रॉपर्टी आईडी बनाने के लूपहोल तो ईओ साहब को बेहतर ढंग से मालूम हैं कि कैसे एनडीसी पोर्टल पर किसी भी जमीन के लिए कोई भी डॉक्यूमेंट अपलोड करके बा-आसानी फर्जी आईडी बनाई जा सकती है। नगर परिषद सूत्रों के अनुसार अधिकतर फर्जी प्रॉपर्टी आईडी बलवान नाम के एक कर्मचारी की लॉग इन आईडी से बनाई गई हैं। अहम बात यह है कि बलवान को कंप्यूटर ऑपरेट करना नहीं आता, बावजूद इसके उसके नाम से लॉग इन आईडी बनाई गई है। यदि जांच हो जाए तो सामने आ जाएगा कि ईओ सुशील भुक्कल के चेलों ने बलवान की आईडी पर प्रापर्टी आईडी में करोड़ों का खेल किया है। पत्रकार वार्ता में उन्हें इस पर भी सफाई देनी चाहिए थी।
ईओ सुशील कुमार भुक्कल अंत में जाति कार्ड भी खेल गए। आत्महत्या करने वाले आईपीएस वाई पूरन कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि अधिकारियों की प्रताडऩा से वह भी बहुत हतोत्साहित हैं, आत्महत्या तो नहीं करेंगे लेकिन इस्तीफा दे देंगे। ईओ साहब सवाल यह है कि आपको जाति का कवच इस्तेमाल करने की क्या जरूरत पड़ी, यदि आप ईमानदारी से काम करते तो किस अधिकारी की हिम्मत थी कि आपके खिलाफ बेवजह कार्रवाई करता। रही बात पूरन कुमार की तो उनके कारनामों की चर्चा लगातार जारी है, उन्होंने आत्महत्या क्यों की थी इस पर भी भिन्न भिन्न प्रकार की चर्चाएं होती हैं। चर्चाएं तो यह भी हैं कि विधायक चाची ने दीपेंद्र हुड्डा का जैक लगवा कर आपको कड़ी कार्रवाई से बचा लिया, यदि निष्पक्ष ढंग से जांच हो गई तो आज नहीं तो कल सच्चाई सामने आएगी ही।