पीजीआईएमएस रोहतक मरीजों को लूटने वाले व्यापारिक अस्पतालों को अंग प्रत्यारोपण का लाइसेंस जल्दी जारी कर देता है लेकिन ईएसआई मेडिकल कॉलेज जैसे कल्याणकारी चिकित्सा संस्थानों को लाइसेंस देने में हजारों रोड़े अटकाए जाते हैं। ईएसआई मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने आंख और गुर्दा प्रत्यारोपण सुविधा का लाइसेंस जारी किए जाने के लिए काफी समय से पीजीआईएमएस रोहतक में आवेदन कर रखा है।
जानकारों के मुताबिक ईएसआई मेडिकल कॉलेज को यह लाइसेंस नहीं देने के लिए कभी अस्थायी फैकल्टी होने तो कभी दूसरे अड़ंगे अटकाए जाते हैं। चिकित्सा सेवाओं के जानकारों के मुताबिक ईएसआई मेडिकल कॉलेज में सेवानिवृत्त फैकल्टी को संविदा पर रखा जाता है जबकि व्यापारिक हॉस्पिटल में तो चिकित्सक दिहाड़ी पर रखे जाते हैं फिर उन्हें यह लाइसेंस आसानी से कैसे उपलब्ध हो जाता है। दरअसल यदि ईएसआई मेडिकल कॉलेज को अंग प्रत्यारोपण का लाइसेंस मिल गया तो शहर के कई बड़े व्यापारी हॉस्पिटल का कारोबार मंदा पड़ जाएगा, क्योंकि जिस प्रत्यारोपण के लिए इन व्यापारिक अस्पतालों में लाखों रुपये लगते हैं वह ईएसआई मेडिकल कॉलेज में लगभग निशुल्क होगा।