मज़दूर मोर्चा ब्यूरो प्रधानमंत्री मोदी की स्मार्ट सिटी योजना न केवल फ्लॉप रही इसके जरिए बल्कि पूरे देश में अरबों खरबों रुपयों की लूटा खाई की गई। मोदी-शाह के इशारों पर चलने के लिए सीएम की कुर्सी पर बैठाए गए कठपुतली सीएम नायब सैनी को स्मार्ट सिटी की लूट कमाई इतनी भायी कि उन्होंने गांव और जिले में भी इस स्मार्ट योजना की घोषणा कर दी। ईमानदारी का ढोल बजा कर सत्ता में आई भाजपा के बीते ग्यारह साल में जिस तरह भ्रष्टाचार चरम पर पहुंचा है, सीएम सैनी उसका विस्तार, हर गांव, शहर और जिले में करने जा रहे हैं।
सीएम सैनी ने बजट में घोषणा की है कि वित्त वर्ष 2025-26 में हर शहर में एक 4-5 किलोमीटर लंबी सड़क और हर जिले में एक 10-15 किलोमीटर लंबी सड़क को स्मार्ट सड़क बनाया जाएगा। इसी तरह हर शहर में एक पुराने बाजार को स्मार्ट बाजार बनाया जाएगा। हर गांव की एक गली को स्मार्ट गली के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए आवश्कतानुसार धनराशि संबंधित निकाय-विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी।
सुधी पाठकों ने स्मार्ट सिटी के तहत बडख़ल चौक से बाईपास तक बनाई गई पीएम मोदी की स्मार्ट रोड तो देखी ही होगी। 2017-18 में ग्रीन बेल्ट से करीब पांच सौ पेड़ काट कर बनाई गई इस स्मार्ट सड़क के दोनों तरफ ई टॉयलेट, साइकिल ट्रैक, ग्रीन बेल्ट और फुटपाथ बनाया जाना था। इसके अलावा करोड़ों खर्च कर वाईफाई, लेजर लाइट शो और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने थे। हालात सबके सामने हैं, एक ओर फुटपाथ तो है लेकिन ग्रीन बेल्ट पूरी तरह नदारद हैं। दूसरी ओर फुटपाथ पर बिजली निगम के मीटर पैनल लगे हैं कि उस पर पैदल भी नहीं चल सकते, इन बिजली पैनलों की आड़ में दुकानदारों ने पूरे फुटपाथ पर अतिक्रमण कर रखा है। साइकिल ट्रैक का पता नहीं है। वाईफाई कभी चलता नहीं, स्मार्ट ई शौचालयों का भी पता नहीं, लेजर लाइट उद्घाटन के दिन ही चलीं, तब से बंद पड़ी हैं।
स्मार्ट सिटी परियोजना का कार्यकाल भी कई बार बढ़ाए जाने के बावजूद पूरा होने को है लेकिन अभी तक इस स्मार्ट सिटी के सेंट्रल वर्ज पर दोनों ओर पूरी रेलिंग नहीं लगाई गई। बरसात में स्मार्ट सड़क पर एक से डेढ़ फुट तक जलभराव हो जाता है। कुल मिलाकर यह सड़क फोर लेन कर दी गई लेकिन अन्य दूसरी सड़कों से अलग इसमें कुछ नहीं है। इस स्मार्ट रोड को फोर लेन बनाने करोड़ों रुपये बहाए गए वो अलग, यहां से उजाड़े गए करोड़ों रुपये कीमत वाले पेड़ों का क्या हुआ, उनके बदले में कहां पौधरोपड़ किया गया ? स्मार्ट सिटी के भ्रष्ट अधिकारियों के पास आज तक इसका जवाब नहीं है। स्मार्ट सिटी परियोजना की बात करें तो बीते आठ साल में 2600 करोड़ रुपयों से अधिक की बंदरबांट हुई।
स्मार्ट सिटी के गबन पर न विपक्ष ने हल्ला किया न जनता ने सवाल उठाए, इससे सीएम सैनी का हौसला बढ़ गया और उन्होंने भी गांव की गलियां, शहर और जिलों की सड़क-बाजारों को स्मार्ट बनाने की घोषणा की है। गांवों में जहां पर्याप्त बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंची हैं वहां स्मार्ट गली बना कर सरकार क्या तीर मारेगी समझा सकता है। वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता सुरेश चंद गोयल कहते हैं कि सैनी ने बहुत ही चालाकी से शहर के पुराने बाजार को स्मार्ट बाजार बनाने की घोषणा की है। अधिकतर पुराने बाजार बिना नगर योजना के स्थापित हुए, इसी कारण यहां चौड़ी सड़कें, फुटपाथ आदि विकसित नहीं हो पाए। इन बाजारों में कोई बड़ा बदलाव किया जाना संभव नहीं है, लेकिन इन्हें स्मार्ट बनाने के नाम पर लूट कमाई करना आसान होगा। रही स्मार्ट सड़कों की बात तो बडख़ल चौक से बाईपास वाली स्मार्ट सड़क का भ्रष्टाचार सबके सामने है, इसी तर्ज पर उन सड़कों पर भी पैसा बहाया जाएगा। जब तक जनता सरकार से अपनी गाढ़ी कमाई का हिसाब मांगने को जागरूक नहीं होगी भ्रष्टाचार इसी तरह होता रहेगा। भविष्य में गांव, सड़क, बाजारों के नाम पर अपना धन डकारे जाने को देखने के लिए जनता तैयार रहे।