निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा भी मैडम मोना की राह पर ही चलते नजऱ आ रहे हैं

निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा भी मैडम मोना की राह पर ही चलते नजऱ आ रहे हैं
May 27 00:26 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) निगमायुक्त की कुर्सी पर बैठते ही खडगटा के तेवरों से समझा जा सकता है कि वे पूर्व निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास से कोई भिन्न कैटगरी के नहीं लगते। लगता है हरियाणा सरकार ने इस नगर निगम को उच्चाधिकारियों की चरागाह मान लिया है और चुन-चुन कर बारी-बारी से एक से बढ़कर एक शातिर अफसरशाह को यह चरागाह पट्टे पर दी जाती है। जब तक अगला कोई पट्टेदार ऊंची बोली न लगाए तब तक पट्टा कायम रहता है। इनके तेवरों की झलक उनकी प्राथमिकताओं में भली भांति देखी जा सकती है।

सबसे पहले इन्होंने जहां दल्लागीरी के लिए उस प्रेम शर्मा को अपनी बगल में चिपका लिया जिसको मैडम मोना ए श्रीनिवास ने शर्मसार होकर अपने दफ़्तर से भगाया था वहीं अपने सरकारी आवास के रेनोवेशन पर सत्तर लाख से एक करोड़ तक का काम अपने मातहतों के जिम्मे डाल दिया। गौर तलब है कि पूर्व निगमायुक्त मोना ने भी अपनी ऐश्वर्य युक्त जीवनशैली के अनुसार रेनोवेशन पर कोई कम खर्च नहीं किया था। शहर की बदकिस्मती है कि हर आने वाला निगमायुक्त पूरी बेरहमी के साथ जनता की खून पसीने की कमाई को बेरहमी के साथ अपने इस आवास पर बहाता रहता है और कोई पूछने वाला नहीं। दरअसल, पूछने वाले खुद कौन से कम हैं, हर मंत्री, मुख्यमंत्री व उच्चाधिकारियों की कोठी का रेनोवेशन के खर्चे तो इनसे भी कहीं अधिक भारी भरकम होते हैं। पिछले दिनों एक केजरीवाल का रोना रोया जा रहा था जबकि इस देश में तो कोई भी केजरीवाल से पीछे रहने को तैयार नहीं है।

सरकार ने आईएएस धीरेंद्र खडगटा को शहर की आधारभूत समस्याओं को दूर कर नागरिक सुविधाएं बेहतर करनेे के लिए नगर निगम भेजा है। इसके विपरीत कुर्सी पर बैठते ही उन्होंने शहर की नाली, पानी, सड़क की समस्याओं को दरकिनार करते हुए अपने निवास में आमूल-चूल परिवर्तन करने का हुक्म सुना डाला। निगम सूत्रों के अनुसार साहब ने जो बदलाव बताए हैं उन पर 65 लाख से एक करोड़ रुपये तक खर्च होने की संभावना है। यह रुपया कितना है इसका अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि शहर के एक मोहल्ले की कई गलियों में 65 लाख रुपये में इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाई जा सकती हैं। 2012 बैच के आईएएस धीरेंद्र खडगटा ने बीते बुधवार को ही निगमायुक्त नगर निगम का पद संभाला था।

मातहतों से औपचारिक मुलाकात और सम्मान आदि के बाद बैठक कर उन्होंने शहर की सड़क, पानी, सीवर की व्यवस्था की कोई चर्चा नहीं की, सरकार की प्राथमिकताएं भी उन्हें याद नहीं रहीं। चीफ इंजीनियर, एक्सइएन आदि को बुलाकर निगमायुक्त आवास के दर-ओ-दीवार से लेकर फर्नीचर तक सब बदल डालने का फरमान सुना डाला। उनके आदेश पर चीफ इंजीनियर से लेकर सारा अमला उनका घर चमकाने में जुटा है। बताया जा रहा है कि रंगरोगन करने से पहले अच्छी खासी तोडफ़ोड़ कर कुछ नया निर्माण किया जाएगा। हालांकि सब अच्छा है लेकिन साहब की इच्छा पर फर्नीचर में भी बदलाव किया जाएगा और सब नया किया जाएगा। इस सबके लिए फिलहाल पैंसठ लाख खर्च होने का अनुमान लगाया जा रहा है लेकिन अनुभवी अधिकारियों का मानना है कि खर्च एक करोड़ तक भी हो सकता है।

अपने घर को दुरुस्त करने का फरमान सुनाने के बाद निगमायुक्त को शहर और शहरवासियों की समस्याओं का ध्यान आया। उन्होंने निगम की कमाई वाले तोडफ़ोड़ विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की और वही राग अलापा जो भ्रष्टाचारी और खाऊ विधायक धनेश अदलखा गा रहा है, विभाग के भ्रष्ट एक्सईएन, एसडीओ और जेई बजा रहे हैं, यानी शहर में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई। यह खुला हुआ सच है कि नगर निगम में बीते दो दशक में जितने भी निगमायुक्त आए सबने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की, नतीजा सामने है कार्रवाई कागजों पर होती रही और सारा शहर अवैध निर्माण से अटता रहा। जाहिर है कि इसमें सबकी जेबें खूब भरी गईं। खडगटा साहब को भी सब मालूम है तो फरमान सुनाना लाजिमी था।

हां, उन्हें ऊपरी कमाई के सारे तौर तरीके बताने वाले भ्रष्टाचारी प्रेम कुमार ने तुरंत लपक लिया। इसके लिए उसे ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ी क्यों कि खडगटा 2019 में इसी नगर निगम में अतिरिक्त आयुक्त रह चुके हैं। उस समय उनको परिचारक के रूप में प्रेम शुक्ला ही मिला हुआ था। निगमायुक्त कार्यालय से लेकर कैंप आफिस हर जगह नए निगमायुक्त का सलाहकार और वसूली एजेंट बन कर घूम रहा है।

कहने को तो मैडम रवि अभी भी निगमायुक्त की पीए हैं लेकिन निगमायुक्त तो प्रेम की सलाह पर ही चल रहे हैं, यहां तक कि खडगटा से मिलने से पहले अधिकारी हों या ठेकेदार सब प्रेम से ही मिलते हैं, उसकी हरी झंडी मिलने के बाद ही निगमायुक्त के पास फाइल आदि लेकर जाते हैं।

मैं मेयर हूँ जो कहूं करो,नो इफ-नो बट
इधर निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा ने करीब एक करोड़ का खर्च बताया तो मेयर प्रणीव बत्रा जोशी भी कहां पीछे रहने वाली थीं। चीफ इंजीनियर को बुलाकर मेयर आवास में चार नए एसी तुरंत लगवाने का फरमान सुना डाला। अधिकारियों ने समझाया कि मेयर आवास में तो पहले से ही तीन ऐसी लगे हुए हैं। यह सुनते ही प्रवीण बत्रा जोशी जोश में आ गईं, बोली मैं मेयर हूं, जो कहूं उसे पूरा किया जाए इमिडिएट, नो इफ, नो बट। बताया जा रहा है कि मैडम अधिकारियों से कोई भी रिपोर्ट इमिडिएट यानी तुरंत ही मांगती हैं, यदि अधिकारी कुछ समय मांगता है तो जोश में कहती हैं आईएम मेयर, डू इट इमिडिएटली, नो इफ, नो बट। मेयर मैडम का नो इफ, नो बट निगम कर्मचारियों के बीच मज़ाक का मुद्दा बना हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि जब निकम्मे अधिकारयों ने कभी कोई रिपोर्ट बनाई हो तभी तो इमिडिएट उपलब्ध कराई जा सकती हैं, जब कुछ है ही नहीं तो कहां से प्रस्तुत करेंगे। यानी मेयर महोदया चाहे जितना जोश दिखाएं और इफ-बट करें, निगम के निकम्मे अधिकारी उसी तरह काम करते रहेंगे जिस तरह बरसों से करते आ रहे हैं।

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Mazdoor Morcha
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