अब संघियों से लेना पड़ेगा देशभक्ति का सर्टिफिकेट

अब संघियों से लेना पड़ेगा देशभक्ति का सर्टिफिकेट
June 01 15:11 2025

मज़दूर मोर्चा ब्यूरो
सोनीपत स्थित अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान के खिलाफ केस और गिरफ़्तारी का बड़ा ही महत्वपूर्ण विषय चार-छह दिनों से चर्चा में है। मज़दूर मोर्चा संपादक के रूप में हमारे लिए इसका महत्व इसलिए भी ज्यादा है कि इसमें हमारे शहर की रेनू भाटिया का इन्वॉल्वमेंट है। रेनू भाटिया को हम ज्यादा नहीं तो जरूर बीते 40 वर्षों से अच्छी तरह से जानते हैं, बहुत अच्छी महिला रही हैं, बड़ी अच्छी कार्यकर्ता रही हैं, पार्षद भी रही हैं और महिला सशक्तिकरण का एक सिंबल भी। हमने उन्हें हमेशा अच्छा ही सुना – देखा था और आज तक एक मिसाल योग्य महिला मानते रहे थे, लेकिन अब जो इन्होंने किया है उससे अपने सारे किए कराए का गुड़ गोबर कर दिया।

हरियाणा महिला आयोग की वो चेयर पर्सन हो गईं! ये अपने आप में कोई ऐसी सत्ता नहीं है जो किसी को गिरफ़्तार कर ले या किसी को सज़ा दे दे, ऐसा कुछ भी नहीं होता। इन्हें केवल किसी फाइंडिंग को कार्रवाई के लिए संबंधित प्राधिकारी को रिकमेंड करने का ही अख्तियार होता है। लेकिन संघ-भाजपा की वजह से और जो इनकी अपनी पॉलिसी चल रही है, उसकी वजह से उनको कुछ ज्यादा ही एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी अधिकार दे रखे हैं। अब सत्ता का जो नशा और घमंड दिमाग में घुस जाता है वो तो है ही, ऊपर से इनके दिमाग में जो आरएसएस का जहर घुस गया है, वो बहुत ही खतरनाक है। इसके कोई अच्छे परिणाम इनके लिए भी आने वाले भविष्य में नहीं हो सकते, यह हमारा मानना है।

अब हुआ क्या, प्रोफेसर अली खान एक बहुत ही पढ़े लिखे हाइली टैलेंटेड पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर हैं, विदेशी यूनिवर्सिटी में पढ़े हैं और इनका काफी मान सम्मान रहा है। इन्होंने कोई फेसबुकपोस्ट लिखा, अब उसमें कुछ भी ऐसा नहीं है जिस पर कोई संज्ञान लिया जा सके। आर्मी-एयर फोर्स की महिला प्रवक्ता कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने प्रेस ब्रीफिंग की थी, प्रोफेसर अली खान ने उनकी तारीफ की, और साथ में कहा ये एक अच्छा ऑप्टिक (नज़रिया) है, आप ये तो कर रहे हो लेकिन दूसरी ओर जो आप मॉब लिंचिंग और बुलडोज करते हो वो भी तो जरा देखो न, ये तो आपने अच्छा किया। यानी उनकी पोस्ट में ऐसा कुछ कहीं नजर आता नहीं, हालांकि वो पोस्ट फेसबुक में इंग्लिश में किया गया था और उसका लब्बो लुआब यही था और उसमें कुछ आपत्तिजनक नहीं था, लेकिन इनको तो कुछ न कुछ करना था। रेणू भाटिया जी ने चंडीगढ़ से एक फरमान जारी कर दिया कि आप आइए मेरे दफ्तर में। अब प्रोफेसर क्यों जाएं भाई ? इन्होंने अपना जवाब वकील के ज़रिए भेज दिया। रेणू भाटिया को यह पसंद नहीं आया। उन्हें इतनी जल्दी थी कि 14 तारीख को सम्मन दिया और 15 को खुद ही पहुंच गईं यूनिवर्सिटी के अंदर। वहां ढूंढती रहीं कि प्रोफेसर अली कहां है? उन्हेें बताया गया कि प्रोफेसर तो छुट्टियों पर हैं इस पर रेणू का सवाल सुनिए, वो छुट्टियों पर हैं तो आप क्यों हैं यहां पर। अरे भाई जिसकी ड्यूटी होगी वही तो मौजूद होगा, जो छुट्टी पर है वो तो नहीं आएगा न।

फिर वहां इन्होंने पुलिस से एक एफआईआर दर्ज करानी चाही। जठेड़ी गांव के अपने संघी प्यादे योगेश को लाकर उससे एक शिकायत लिखवाई। वो कहता है कि मेरे सामने इस प्रोफेसर ने कहा कि ये जो फौजी हैं पागल हैं, ये यूं करते हैं! मतलब वाहियातपने की बातें। पक्का करने के लिए कहा कि प्रोफेसर ने चार पांच लोगों के सामने बात यह कही और इस पर एफआईआर करो। रेणू के पीछे तो सरकार बोल रही थी ना। वहां की पुलिस कमिश्नर नाजनीन भसीन का तबादला कर दिया गया। श्जल्दबाजी इतनी कि प्रोफेसर अली खान का यूनिवर्सिटी आने का भी इंतजार नहीं किया, सीधे उसके ग्रेटर कैलाश में घर पहुंच गए वहां से गिरफ्तार कर लाए, बड़ी आफत मची थी भाई।

बीते दिनों की बात है इंडिया टुडे वालों की प्रीति चौधरी नामक एक तेजतर्रार जर्नलिस्ट ने रेणू भाटिया का इंटरव्यू किया, उन्होंने रेणू भाटिया से कई बार पूछा कि मुझे वो लाइन तो बता दो जिसमें देशद्रोह है, सेडिशन बनता है या सेना की महिला अधिकारियों की मोडेस्टी (मान) पर कोई बात कही हो, मुझे वो लाइन दिखा दो मैडम। रेनू के पास कुछ नहीं था, बस अपनी बात को घुमाए जा रही थीं बार-बार। फिर पत्रकार पूछती है कि आपकी जुरिस्डिक्शन कहां बनती है? पोस्ट में तो महिलाओं के बारे में ऐसा कुछ नहीं है तो आप कहां अधिकार रखती हैं, लेकिन रेणू का ढर्रा तो मैं ना मानूं वाला ही रहा। मामला कोर्ट में गया तो सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर अली को अंतरिम जमानत दी, साथ ही इस मामले में कोई नया केस दर्ज करने से भी हरियाणा पुलिस को मना किया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी प्रोफेसर की आनन फानन गिरफ़्तारी को मानवाधिकार हनन मानते हुए डीजीपी हरियाणा को पत्र लिख कर जवाब तलब किया है।

ये तो एक मसला हो गया! इसी के समानांतर दूसरा मसला देखिए। मध्य प्रदेश के मंत्री महोदय हैं कुंवर विजय शाह, वो स्टेज से भाषण देता है और हमारी कर्नल कुरैशी को आतंकवादियों की बहन बताता है। सरकार ने या पुलिस ने तो करना कुछ नहीं था, हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अटार्नी-एडवोकेट जनरल को बुलाया और उसे आदेश दिया कि एफआईआर करके चार घंटे में हमें रिपोर्ट दो। मजबूरी में लंगड़ी लूली एफआईआर दर्ज की गई, जो जो धाराएं लगनी चाहिए थी वो नहीं लगाई गईं, गिरफ्तारी तो खैर करनी क्यों थी।

इस पर मंत्री महोदय सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए और बेशर्मों की सरकार, इन्हें बेशर्म तो क्या कहा जाए! इन्होंने तो कह रखा है कि हम माफी नहीं मांगा करते और हमारे यहां इस्तीफे नहीं हुआ करते। खैर, कोर्ट में थोड़ी सी शरमा शरमी में मंत्री जी के वकील ने बड़े हंसी में, हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि मैं माफी मांगता हूं। तो कोर्ट ने कहा ये तुम्हारा माफी मांगने का तरीका है या तुम मजाक कर रहे हो? और उनकी माफी की भी भत्र्सना की। सुप्रीम कोर्ट भी माशा अल्लाह सुप्रीम कोर्ट है वहां मंत्री महोदय को एक बार तो खदेड़ दिया कि जाइए हाई कोर्ट में, बाद में सुनवाई की।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या गजब किया? बोला इसकी एसआईटी बना दो जिसमें किसी अन्य राज्य के आईजी लेवल के इंचार्ज अफसर हों। किसी अन्य राज्य मेें तो गुजरात के भी आ सकते हैं, यूपी के भी आ जाएंगे, राजस्थान के भी आ जाएंगे यानी सारे तो भाजपा के हैं कोई दिक्कत नहीं। सवाल यह है कि कोई ब्लाइंड मर्डर है क्या? कोई ब्लाइंड डकैती है क्या? जिसकी सर्च करनी है, अरे भई ओपन भाषण है उसमें एसआईटी क्या करेगी। समझने वाली बात है एक आईजी एक व्यक्ति नहीं होता उसका पूरा अमला चलता है उसके आगे पीछे। एस्कॉर्ट और पायलट चलती है, उसका ड्राइवर, गन मैन, रीडर नायब रीडर, स्टेनो आदि 10 आदमी का स्टाफ चलता है। काम तो एक ले दे के एक हवलदार का है या ज्यादा से ज्यादा एक इंस्पेक्टर का। मंत्री का खुला बयान ऑनलाइन मौजूद है, सब लिखा हुआ है वीडियो बनी हुई है, उसमें आईजी क्या करेंगे?

दरअसल, काम को टरकाना है काम को करना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट को चाहिए था कि मंत्री से कहता तू वापस जा और एसपी साहब, डीजी साहब, आपने अब तक इसको अंदर क्यों नहीं किया? पर यह कहे कौन? यह तो कह नहीं सकते ना। अब वो तारीख तारीख-तारीख खेलते रहेंगे और मंत्री अपना आजाद घूमता रहेगा, यही सिलसिला चलता रहेगा।

एक तरफ तो मंत्री कुंवर विजय शाह हैं और एक तरफ प्रोफेसर अली खान। अब अली खान के बारे में रेणू जी बताती हैं कि इनके दादा लखनऊ के पास महमूदाबाद की कोई रियासत के बड़े नवाब या राजा थे। वे कभी मुस्लिम लीग से जुड़े हुए थे, मुस्लिम लीग के कैशियर थे उसको चंदा दिया था, या कभी पाकिस्तान को हिजरत कर गए थे। अब वो बदला निकालना है, अरे बदला तो उनसे निकालना था लेकिन प्रोफेसर अली या उसके पिता तो यहीं पे बसे हुए हैं, यहां पे काम कर रहे हैं, इन पर तो कोई आरोप नहीं है। आप इसके दादा को तो देख रहे हो इसके नाना को क्यों नहीं देख रहे? प्रोफेसर अली खान के नाना जगत सिंह मेहता थे, जब अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री होते थे तब मेहता विदेश सचिव थे और पद्म भूषण से सम्मानित हुए। इनकी नानी भी बड़ी साहित्यिकार हस्तियों में शामिल थीं।

उन्हें नहीं देख रहे आप, 70, 80, 90 साल पहले उनके दादा को याद किया जा रहा है। वो बकरी मेमने वाली बात हो गई ना, भई तूने गाली नहीं दी तो तेरे बाप ने दी होगी, तेरे बाप ने नहीं तो दादा ने दी होगी, गाली तो दी है ना तूने नहीं तो उसने दी होगी, वही काम ये कर रहे हैं, तो इस तरह का ड्रामा हमारे यहां चल रहा है। दूसरी मजे की बात यह है कि अब केंद्र सरकार ने 32 देशों में ऑल पार्टी डेलीगेशन भेजा है। सभी दलों के सांसदों का डेलिगेशन कांगो, सिएरा लियोन आदि ऐसे ऐसे देश जिनके नाम आप सुने भी नहीं होंगे वहां जाकर बताएगा कि हमारा पाकिस्तान से क्या झगड़ा था और हमने ऑपरेशन सिंदूर में क्या किया था। अरे मोदी जी आपको अब याद आया है? पिछले 11 साल से आप जो उडऩ खटोला लेकर सारे देशों में घूम रहे थे, 88 यात्राएं कर लीं 70-80 देशों में आप घूम आए, वो क्या कर रहे थे आप?

समझने वाली बात है कि हर देश में तो भारत की एंबेसी है, हाई कमीशन है और तरह-तरह के दफ्तर हैं। हर दफ्तर में 40 से 100 आदमी काम कर रहे हैं वो नहीं समझा रहे उन देशों को? मोदी जी आप भी तो कितनी बार समझाने गए विदेश, आपका तो विदेशों में डंका बज रहा था जोर जोर से, मोदी-मोदी मोदी हो रही थी वो क्या था? वो डंका नहीं था क्या? वो लोग तब नहीं समझे थे कि आप क्या कर रहे हो? जो खर्च हो रहा था वो सारा एम्बेसियों का खर्चा हो रहा था, वो जो भाड़े की भीड़ ला कर आप ड्रामा कर रहे थे ना, उसमें सारा पैसा भारत का ही खर्च हो रहा था, और उसका रिजल्ट आज हमारे सामने है। दरअसला, एंबेसीज ने जो करना था वो तो किया नहीं अब आपके सांसद समझा के आएंगे। विदेशों में इन सांसदों से जब सवाल पूछे जाएंगे कि आप हमें तो समझाने आ गए हो लेकिन आपके अपने देश में क्या हो रहा है? देश में आप जो हरकतें और ड्रामे कर रहे हो इस पर वो सवाल नहीं पूछेंगे क्या?

यहां तो आप सवाल पूछने वाले को देशद्रोही बता देते हो वहां किस-किस को क्या-क्या बताओगे आप ? वो वहां जाकर करेंगे क्या? आपकी इन नाटकबाजियां का मतलब क्या है? आपकी विदेश नीति तो नंगी हो गई, ऑपरेशन सिंदूर के मामले में एक भी देश तो आपके हक में आकर नहीं बोला। पाकिस्तान क्या पिद्दी क्या पिद्दी का शोरबा जिसकी बेचारे की कोई औकात नहीं उसके हक में चाइना जैसा बड़ा देश खड़ा हो गया। चाइना हमसे 100 बिलियन डॉलर का मुनाफा हर साल कमाता है, यह कोई छोटी रकम नहीं है इसके बाद भी वो आपके हक में नहीं बोला। अमेरिका तो खैर, अपने दोनों हाथ में पप्पू रखता है। तुर्किए ने तो अपना युद्धपोत ही भेज दिया, अजऱबायजान पाकिस्तान के हक़ में खड़ा हो गया। आपके हक में कौन आया? कोई नहीं आया, इजराइल ने भी थोड़ा सा मुंह देखा सा किया। जिस अफगानिस्तान को आपने रिकॉग्नाइज नहीं किया हुआ है, जिसकी एंबेसी तक हमारे यहां नहीं है, उसने आपकी आवाज में थोड़ी सी आवाज जोड़ी है, बाकी कोई देश, यहां तक कि आपका कोई पड़ोसी आपके साथ आने को तैयार नहीं, ये है आपकी 11 साल की विदेश नीति की ‘सफलता।

अब आपका डेलीगेशन वहां जाकर क्या करेगा? वो किस-किस को क्या-क्या सफाइयां देगा? एक ओर आप चुप रहने की बात कह के अपोजिशन का मुंह बंद रखना चाहते हो, फिर अपनी राजनीति करते हो। विपक्ष को तो सवाल पूछने से रोकते हो और अपने आप को प्रोजेक्ट करते हो। अपने पोस्टर लगाते हो बगल में हेलमेट दबा के पायलट की फ्लाइंग किट पहन के वीडियो शूट कराते हो, जैसे आप खुद ही ऑपरेशन सिंदूर करके आए हो। आपने अफसरों की, एयरफोर्स और आर्मी वालों की मीटिंग बुलाकर फोटो शूट करवाया, जैसे आपने ही उनको ट्रेनिंग दी थी, आपने ही उनको बताया था कि जब बादल छाए हों तब जाकर हमला करना ताकि बादलों में आपका हवाई जहाज रडार को नजर नहीं आएगा। आप इतने ‘बुद्धिमानÓ हैं आप उनको बताते हो कि कैसे करना है। फोर्सेज़ ने, सेनाओं ने जो काम किया उस पर तो आपने एक मिनट में पानी फेर दिया। आपने देश को बताया कि सेना को खुली छूट दे दी है लेकिन उसको चलने तो नहीं दिया आपने।

सवाल वही फिर खड़े हैं पहले वाले, एक कहावत है अगर हांडी का मुंह खुला है तो कुत्ता मुंह मारेगा, अगर आपका बॉर्डर, आपका एरिया सिक्योर्ड नहीं है तो चोर-डाकू, आतंकवादी तो हरकत करेगा ही। जहां 2000 आदमी लगातार आ जा रहे हैं वहां आपकी सिक्योरिटी क्यों नहीं थी? यह जवाब तो आपके सिर पर हमेशा रहेगा। आपने उनमें से किसको पकड़ा आज तक? दावे तो आप कर रहे थे कि मैं ढूंढ के लाऊंगा, मैं एक एक को पकड़ के इबरतनाक सजा दूंगा। किसको ढूंढ लिया? किसको पकड़ लाए आप? कोई नहीं पकड़ा गया। 100-50 आदमी उनके मारे गए, 100-50 हमारे मारे गए। हमारे कुछ जहाज क्लेम किए जा रहे हैं, अब हमारी सरकार तो नहीं बता रही कि हमारे जहाज टूट गए, हमारा कुछ हो गया लेकिन विदेशी एजेंसियां क्लेम कर रही हैं, हम डिनाई कर रहे हैं? पाकिस्तान तो खैर झूठ बोलता ही है, हम मानते हैं झूठ बोल रहा है लेकिन विदेशी एजेंसियां क्या कह रही हैं अब यह तो विचारणीय विषय है, ये तो समय बताएगा कौन सच्चा है कौन झूठा है, हम उस पर नहीं जाते लेकिन जो हो रहा है ये शोभनीय तो नहीं है, और जिस तरह से हमने ऑपरेशन किया है ये कोई अच्छी बात नहीं।

असल में तो जिस दिन पहलगाम पर आतंकी हमला हुआ था, अगर हम में कुछ शर्म होती तो तुर्त-फुर्त हमको जवाब दे देना चाहिए था। हमने तो 12-14 दिन दे दिए ताकि वो भी संभल जाएं, और रही सही कसर विदेश मंत्री एस जयशकर ने खुलेआम यह कह कर पूरी कर दी कि मैंने उनको (हमले से पहले) बता दिया है कि हमारी फ़ोर्स आ रही है और हम आतंकवादी ठिकानों पर हमला करेंगे, हम और कहीं हमला नहीं करेंगे। अरे, ये कौन सी अक्लमंदी है भाई, तुम हमला करने से पहले ही बता रहे थे, वो पागल के बच्चे हैं जो वहां बैठे रहेंगे। जो बड़े-बड़े आतंकवादी थे मौलाना अजहर और हाफिज़़ सईद वगैरह वो भी दाएं बाएं हो गए, सब निकल गए वहां से। अब लंगड़े-लूले, अद्धे-बच्चे मर मरा गए तो मर मरा गए। हमने उनके मार दिए उन्होंने हमारे मार दिए, अल्ला अल्ला खैर सल्ला।

ये कर क्या रहे हो आप? क्या आउटकम है आपका? कुछ नहीं। सारा क्रेडिट तो अमेरिका ले गया, ट्रंप खम ठोंक कर कहता है मैंने इनको रोक दिया, मतलब मैंने ही शुरू कराया था और मैंने ही खत्म भी करा दिया। ये क्या गेम खेल रहे हो आप? अगर ये आपकी पॉलिटिक्स रहेगी तो इसके अच्छे परिणाम कभी नहीं आ सकते।

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Mazdoor Morcha
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