फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) दिन-ब-दिन बढ़ता प्रदूषण अब जानलेवा होता जा रहा है। इसका प्रमाण अस्पतालों व डॉक्टरों के सामने आये दिन मरीजों की बढ़ती कतारों से मिलता है। इसके चलते
फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) शुद्ध हवा में सांस लेना मनुष्य का जन्मसिद्ध मौलिक अधिकार है। जो सरकार मनुष्य के इस मौलिक अधिकार को भी सुरक्षित न रख सके उससे निकृष्ट एवं
फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) शासन-प्रशासन द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के तमाम प्रयास असफल होने के बावजूद बीते दो दिन से इसमें कुछ राहत इसलिए महसूस की जा रही है कि वायु का
फरीदाबाद (मजदूर मोर्चा) बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित न कर पाने के इनाम के तौर पर केंद्र सरकार ने नगर निगम को 32 करोड़ रूपये का अनुदान दिया है। इस राशि
फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) किसकी दिवाली हैप्पी हुई और किसकी नहीं, यह तो खोज का विषय है, परन्तु वायु प्रदूषण न केवल शहर का बल्कि पूरे क्षेत्र का हैप्पी हो गया
फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) अक्टूबर का महीना समाप्ति की ओर है, हवा में खुनकी के साथ-साथ गति भी ठीक-ठाक है, इसलिए अभी वायु प्रदूषण ज्यादा महसूस नहीं हो रहा। परन्तु अगले
फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) शहर में बढ़ते प्रदूषण व उससे निपटने के नाम पर गै्रप का नाटक कोई नई बात नहीं है। यह सिलसिला बीते कई वर्षों की तरह आज भी
फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) प्रदूषण को लेकर जो प्रशासन रात दिन किसानो की पराली पर हो हल्ला मचा रहा था, उसे अब शहरों में गली गली में जलते कचरे के ढेर,
फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भ्रष्टाचार का अड्डा नगर निगम के खाऊ-कमाऊ निकम्मे अधिकारी लूट कमाई के नए नए तरीके गढऩे में माहिर हैं। अब वायु प्रदूषण के कारण पता लगाने के
फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा)। जिला उपायुक्त विक्रम सिंह प्रदूषण घटाने के लिए रोजाना नई-नई घोषणाएं कर रहे हैं और शहर की आबोहवा लगातार प्रदूषित होती जा रही है। बुधवार को शहर