कुछ तो अति अतीतजीवी हैं…

कुछ तो अति अतीतजीवी हैं…
December 16 08:19 2024

डॉ. रामवीर

कुछ तो अति अतीतजीवी हैं
कुछ बस आधुनिकताजीवी,
दो ध्रुवीय मित्रों के मध्य
कहीं उपेक्षित पड़े हैं हम भी।

जो कुछ बीता बीते युगों में
वह सब था बढिय़ा ही बढिय़ा,
उसके बाद जो घटा विश्व में
वह सारे का सारा घटिया।

‘दूर के ढोल सुहावने’ यह
जो सुनते आए हैं कहावत,
केवल स्थानिक दूरी नहीं
काल की दूरी के भी बाबत।

यह अतीतवाद की दृष्टि
मिलती है सारी दुनिया में,
‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’
ट्रम्प का नारा था कम्पेन में।

बीते युग की ग्रेटनैस का
एक तरह का यह सम्मोहन,
राजनीति में करता देखा
भावनाओं का अनुचित दोहन।

अतीतवादियों के विपरीत
आधुनिकता की है रीत,
जिसमें केवल वर्तमान के
ही गाए जाते हैं गीत।

उचित-अनुचित औ अच्छे बुरे की
काल ही जब हो जाए कसौटी,
तो लगता है जैसे चिन्तन
की प्रक्रिया ही हो गई खोटी।

दुष्ट रामराज में भी थे
और आज भी कमी न उनकी,
दृष्टिदोष से हर द्रष्टा को
शक्ल दीखती नहीं दुष्ट की।

कवि उपदेश नहीं देता है
कवि करता है मात्र इशारा,
समुचित होगा यदि मानव-मन
तोड सके काल की कारा।

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