तोडफ़ोड़ के लिए नहीं कमाई के लिए होता है सर्वे

तोडफ़ोड़ के लिए नहीं कमाई के लिए होता है सर्वे
February 04 01:07 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) हूडा के सेक्टरों व मार्केट में अवैध निर्माणों का सर्वे किए जाने का पाखंड किया जा रहा है। हूडा की रिज्यूम प्रॉपर्टी की जानकारी इकट्ठा की जा रही है, नक्शे से इतर कराए गए निर्माण का भी चिह्नांकन किया जा रहा है। हालांकि अधिकारी तो दावा कर रहे हैं कि यह सर्वे- निरीक्षण आदि बड़े पैमाने पर कार्रवाई करने के लिए कराए जा रहे हैं लेकिन अब तक के रिकॉर्ड को देखते हुए स्पष्ट है कि यह सब अवैध निर्माणकर्ताओं से वसूली करने की ही कवायद है। यदि ऐसा नहीं है तो देखना होगा कि कब हूडा इनके खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाएगा।

हूडा के एसडीओ विनोद शर्मा ने बताया कि नियमों के खिलाफ किए गए अवैध निर्माणों की जांच चल रही है। उन्होंने यह भी माना कि कई मामले सामने भी चुके हैं, अवैध निर्माण करने वालों को नोटिस दिए जा रहे हैं। इमारत का निर्माण पूरा किए बिना कंप्लीशन लेने वाले मामलों की गहनता से जांच की जाएगी। उनके बयान और सच्चाई के बीच जमीन आसमान का अंतर बता रहा है कि हूडा में भ्रष्टाचार किस स्तर तक व्याप्त है।

हूडा सर्वे करा रहा है और सेक्टरों में, मार्केट में नियम कानूनों की जमकर धज्जियां उड़ाते हुए अवैध निर्माण जारी हैं। भ्रष्टाचार का स्तर यहां तक पहुंच चुका है कि निकम्मे अधिकारी आर्किटेक्ट की झूठी-सच्ची रिपोर्ट को आंख बंद कर स्वीकृत कर देते हैं। बिना मौका मुआयना किए, जमीन खाली पड़ी है या निर्माण हुआ है, देखे परखे बिना ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। जाहिर है कि जेई, एसडीओ व अन्य अधिकारी लोकहित में तो बिना जांच कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं करते, आर्किटेक्ट मोटा चढ़ावा चढ़ाते हैं। सूत्रों के अनुसार अवैध निर्माण कराने वाले नगर निगम के दलालों इनमें महिला दलाल भी शामिल हैं, का अब हूडा कार्यालय में भी जमावड़ा लगने लगा है, इनमें से कई तो आर्किटेक्ट के चोले में दलाली कर रहे हैं। ये दलाल बिना अधिकारियों के पास गए और सर्वे के बिना ही नक्शा निर्माण, कंप्लीशन और ऑक्यूपेशन सर्टिफिेकेट सब कुछ दिलाने की बाकायदा गारंटी और ठेका लेते हैं।

हूडा सूत्रों के अनुसार एक दो नहीं सैकड़ों ऐसी इमारतों को कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया गया है जिनमें अधिकतर में पच्चीस प्रतिशत भी निर्माण नहीं हुआ है। प्राधिकरण की साइट पर इन इमारतों को कंप्लीट दर्शाया जा रहा है जबकि मौके पर हकीकत कुछ और है। मोटी लेन देन कर कंप्लीशन हासिल करने के बाद आर्किटेक्ट नक्शे का उल्लंघन कर मनमर्जी का निर्माण करते हैं। फ्लोर एरिया रेश्यो का उल्लंघन कर सौ प्रतिशत पर निर्माण किया जा रहा है। आवासीय प्लॉटों को बिल्डर फ्लोर की तरह बनाया जा रहा है यानी नियम विरुद्ध तरीके से प्रत्येक फ्लोर के लिए अलग गेट बनाया जा रहा है। मार्केट में अनुमत एक मंजिल वाणिज्यिक की जगह तीन-तीन मंजिल के वाणिज्यिक भवन बनाए जा रहे हैं। सेक्टर 21सी, 21 डी, सेक्टर 46 सहित अन्य सेक्टरों व मार्केट में अनेक ऐसी इमारतें हैं जो निर्माणाधीन हैं लेकिन प्राधिकरण की वेबसाइट पर इनका निर्माण पूर्ण दर्शाया जा रहा है। सेक्टरों में यह अवैध गतिविधियां धड़ल्ले से जारी हैं और सर्वे शाखा रिकॉर्ड तैयार कर रही है। सामाजिक कार्यकर्ता विष्णु गोयल कहते हैं कि उन्होंने हूडा के सेक्टरों व मार्केट में हो रहे अवैध निर्माणों की शिकायत हूडा के आला अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री उडऩ दस्ते तक से की हुई है, एक आध मामले में जांच शुरू भी हुई लेकिन उस पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी नहीं दी गई। अवैध निर्माण अपनी जगह हैं तो जाहिर है कि जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई।

जानकार बताते हैं कि सर्वे करने का मकसद अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं बल्कि निर्माणकर्ता से नहीं गिराने के एवज में मोटा नजराना वसूलना है। जेई-एसडीओ केवल उन्हीं अवैध निर्माण का सर्वे करने जाते हैं जिसकी कोई शिकायत की गई हो। अन्य अवैध निर्माण के लिए उन्होंने अपने एजेंट, दलाल छोड़ रखे हैं। ये दलाल खुद भी हूडा के सेक्टरों में घूम-घूम कर होने वाले निर्माण की सूचना अधिकारियों को देते हैं, नोटिस जारी करवा खुद ही मध्यस्थता करते हुए अच्छी खासी रकम लेकर मामला निपटवाते हैं, इसमें अधिकारियों की बड़ी हिस्सापत्ती होती है। एसडीओ विनोद जिस सर्वे की बात कर रहे हैं उसकी रिपोर्ट कब आएगी और अवैध निर्माण पर कार्रवाई कब होगी वह भी नहीं बताते।

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Mazdoor Morcha
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