सेक्टर-28 में अमोलिक सिटी लाईफ मॉल नियमों के उल्लंघन का नमूना बन गया है फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) जनता का वोट पाकर सांसद-मंत्री और भूमाफिया बने कृष्णपाल गूजर अपनी खुदगर्जी के लिए सत्ता का जमकर दोहन और दुरुपयोग कर रहे हैं। सेक्टर 28 में उनके पौत्र के नाम पर अमोलिक सिटी लाइफ मॉल अभी निर्माणाधीन ही है यानी उसे कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं मिला है लेकिन उसमें व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। यही नहीं मॉल निर्माण में हूडा के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं लेकिन मंत्री के रसूख के आगे नतमस्तक हूडा प्रशासक से लेकर जिला प्रशासन सब आंखें बंद किए हुए हैं।
सेक्टर 28 में दिल्ली-मथुरा हाईवे पर निर्माणाधीन मंत्री गूजर के इस मॉल की पार्किंग के लिए ग्रीन बेल्ट पर न केवल कब्जा किया गया है बल्कि वाहनों की आवाजाही में कोई परेशानी न हो इसके लिए इसे बाकायदा सीमेंटेड फर्श में तब्दील कर दिया गया है। ग्रीन बेल्ट ही नहीं मेट्रो रेलवे के एलिवेटेड ट्रैक के नीचे की जमीन पर भी कब्जा कर लिया गया है यहां तक मॉल के सामने वाले पडऩे वाले मेट्रो पिलर संख्या 619-620 के बीच की सारी जमीन पार्किंग बना डाली गई है। जानकारों के अनुसार सुरक्षा कारणों से मेट्रो एलिवेटेड रूट के नीचे किसी भी तरह की व्यावयायिक, या सामाजिक गतिविधियां किया जाना अवैधानिक और खतरनाक है। रूट के नीचे केवल ग्रीन बेल्ट ही बनाई जा सकती है। पिलर में किसी वाहन की टक्कर न हो इसके लिए यदि कोई पिलर सड़क पर आता है तो उसके चारों ओर स्कर्टिंग की जाती है, पिलर के चारों ओर कॉलर भी बने होते हैं। मंत्री गूजर के मॉल के सामने बनाई पार्किंग में दो पहिया चार पहिया वाहन इन पिलरों तक बेरोकटोक पहुंच कर खड़े हो रहे हैं, जो कि सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक है। ग्रीन बेल्ट पर कब्जा होने पर हूडा से लेकर वन विभाग तक सब मौन हैं।
यही नहीं इस मॉल के लिए कोई सर्विस रोड नहीं है। जो कनेक्टिंग रोड बनाई गई है वह हाईवे से समकोण पर जुड़ती है, जबकि हाइवे से कनेक्टिविटी में पीछे से आने वाले वाहनों से टक्कर न हो इसके लिए इस तरह की सड़क को न्यून कोण बनाते हुए कुछ दूर तक समानांतर चलने के बाद मुख्य मार्ग से जोड़ा जाता है।
यह कनेक्टिविटी सड़क हाइवे से काफी नीची है और बीच में मेट्रो का पिलर भी पड़ता है ऐसे में दिल्ली की ओर से आने वाले तेज गति वाहन चालक इस सड़क से आने वाले वाहन को दूर से नहीं देख सकते जो कि दुर्घटना का सबब बन सकता है। यहां कोई संकेतक भी नहीं लगाया गया है। बावजूद इसके नेशनल हाइवे अथारिटी के अधिकारी मौन भी साधे हुए हैं। अतिक्रमण के नाम पर गरीबों की रेहड़ी, तोडऩे के लिए तो पूरा अमला जुट जाता है, लेकिन मंत्री गूजर के इतने बड़े अतिक्रमण के खिलाफ कोई विभाग अभियान चलाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है, यही है मोदी-सैनी की डबल इंजन सरकारों का सुशासन।